संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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दैत्यों के शस्त्रों से व्रणों से निकलते हुए रुधिर से उन नित्याओं का कलेवर रक्त से समाप्लुत था और उसी दशा में वे जयोद्धत होती हुई श्री ललिता देवी को आकर प्रणाम करने लगी थीं ।१०६। इस प्रकार से वहाँ पर रात्रि में भयकर महान् युद्ध हुआ था । श्री ललिता देवी ने नित्याओं के उस स्वरूप को जो शस्त्रों से विक्षत था, देखा था । सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनकर महाराज्ञी ने कृपा दृष्टि से उनको देखा था । उनके देखने मात्र से ही समस्त व्रण भरकर ठीक हो गये थे ।१०७-१०८। नित्याओं के उस विक्रम से भी ललिता देवी को बड़ी प्रसन्नता हुई थी ।१०६।
भंडपुत्र वध वर्णन
दशाक्षौहिणिकायुक्तः कुटिलाक्षोऽपि वीर्यवान् । दण्डनाथाशरैस्तीक्ष्णै रणे भग्नः पलायितः । दशाक्षौहिणिकं सैन्यं तया रात्रौ विनाशितम् ॥१
इमं वृत्तांतमाकर्ण्य भण्डः क्षोभमथाययौ । रात्रौ कपटसंग्रामं दुष्टानां निर्जरद्रुहाम् । मंत्रिणी दण्डनाथा च श्रुत्वा निर्वेदमापतुः ॥२
अहो बत महत्कष्टं दैत्यैर्देव्याः समागतम् । उत्तानबुद्धिभिर्दू रमस्माभिश्चलितं पुरः ॥३
महाचक्ररथेंद्रस्य न जातं रक्षणं बलैः । एतं त्ववसरं प्राप्य रात्रौ दुष्टैः पराकृतम् ॥४
को वृत्तांतोऽभवत्तत्र स्वामिन्या किं रणः कृतः । अन्या वा शक्तयस्तत्र चक्रुर्युद्धं महासुरैः ॥५
विम्रष्टव्यमिदं कार्यं प्रवृत्तिस्तत्र कीदृशी । महादेव्याश्च हृदये कः प्रसंगः प्रवर्तते ॥६
इति शंकाकुलास्तत्र दण्डनाथापुरोगमाः । मंत्रिणीं पुरतः कृत्वा प्रचेलुर्ललितां प्रति ॥७