संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभण्डपुत्र वध वर्णन | ३६७
तस्याः पराक्रमोन्मेषैर्नृत्यन्त्यो जयदायिभिः । शक्तयस्तुमुलं चक्रुः साधुवादैर्जगत्त्रयम् ॥११४॥ सर्वाश्च शक्तिसेनान्यो दण्डनाथापुरःसराः । तदाश्चर्यं महाराज्ञ्यै निवेदयितुमुद्गताः ॥११५॥ ताभिर्निवेद्यमानानि सा देवी ललितांबिका । पुत्रीभुजावदानानि श्रुत्वा प्रीतिं समाययौ ॥११६॥ समस्तमपि तच्चक्रं शक्तीनां तत्पराक्रमैः । अदृष्टपूर्वैर्देवेषु विस्मयस्य वशं गतम् ॥११७॥
और उस महाराज्ञी की पुत्री ने भंडासुर के सब पुत्रों को विध्वस्त कर दिया था और फिर मन्त्रिणी और दण्डनाथा के द्वारा बार-बार आलिंगन की गयी थी तथा इन दोनों को बड़ी ही प्रसन्नता हुई थी ।११३। उस कुमारिका के जो विजय देने वाले पराक्रमों के उन्मेषों से नृत्य करती हुई शक्तियों के साधुवादों के तुमुल घोष से तीनों लोकों को भर दिया था ।११४। समस्त शक्तियों के सेनानियों ने जिनमें दण्डनाथा भी थी उस महान आश्चर्य जनक युद्ध की विजय को महाराज्ञी को निवेदन करने के लिए तैयारी की थी ।११५। ललिता देवी ने अपनी पुत्री की भुजाओं के अवदानों को जो उन शक्तियों के द्वारा सुनाये गये थे श्रवण करके बहुत ही अधिक प्रसन्नता प्राप्त की थी ।११६। वह समस्त चक्र शक्तियों के अदृष्ट पूर्व पराक्रमों से देवों के भी विस्मय करने वाला हो गया था ।११७।
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॥ गणनाथ पराक्रम वर्णन ॥
अथ नष्टेषु पुत्रेषु शोकानलपरिप्लुतः । विललाप स दैत्येन्द्रो मत्वा जातं कुलक्षयम् ॥१॥ हा पुत्रा हा गुणोदारा हा मदेकपरायणाः । हा मन्नेत्रसुधापूरा हा मत्कुलविवर्धनाः ॥२॥ हा समस्तसुरश्रेष्ठमदभंजनतत्पराः । हा समस्तसुरस्त्रीणामंतर्मोहनमन्मथाः ॥३॥