भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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गणनाथ पराक्रम वर्णन ] [ ३७३

करते हुए उसने शाल को अवकाश न पाया था। फिर दक्षिण में द्वार पर पहुँचकर क्षण भर उस उद्धत ने सोचा था।३२। वहां पर सावधान-महान बली-हाथों में हथियार उड़ाये हुए-यानों पर समारूढ़ और संनद्ध वर्मों वाले जो द्वार देश पर स्थित थे, देखे थे।३३। सर्वदा द्वार की रक्षा के लिए दण्डनाथा के द्वारा निर्दिष्ट विशति अक्षोहिणी सेना से संयुत स्तम्भिनी प्रमुख शक्तियां थीं।३४। उनको देखकर वह विस्मय से समाविष्ट हो गया था और उस समय में उसने विचार बहुत देर तक किया था। शाल के बाहिर ही स्थित होकर उसने यन्त्र को फैलाया था।३५।

गव्यूतिमात्रकायामे तत्समानप्रविस्तरे । शिलापट्टे सुमहति प्रालिखद्यन्त्रमुत्तमम् ॥३६॥ अष्टदिक्ष्वष्टशूलेन संहाराक्षरमौलिना । अष्टभिर्दैवतैश्चैव युक्तं यन्त्रं समालिखत् ॥३७॥ अलसा कृपणा दीना नितन्द्रा च प्रमीलिका । क्लीबा च निरहंकारा चेत्यष्टौ देवताः स्मृताः ॥३८॥ देवताष्टकमेतच्च शूलाष्टकपुटोपरि । नियोज्य लिखितं यन्त्रं मायावी सममन्त्रयत् ॥३९॥ पूजां विधाय मन्त्रस्य बलिभिश्चागलादिभिः । तद्यन्त्रं चारिकटके प्राक्षिपत्समरेऽसुरः ॥४०॥ प्राकारस्य बहिर्भागे वर्तिना तेन दुर्धिया । क्षिप्तमुल्लंघ्य च रणे पपात कटकांतरे ॥४१॥ तद्यन्त्रस्य विकारेण कटकस्थास्तु शक्तयः । विमुक्तशस्त्रसंन्यासमास्थिता दीनमानसाः ॥४२॥

उसने आठ देवताओं से युक्त यन्त्र को लिखा था। दो कोश की चौड़ाई में और उतने ही निस्तार में एक शिला पट्ट पर जो महान था उस उत्तम यन्त्र को लिखा था। वह यन्त्र आठ दिशाओं में आठ शूल संहाराक्षर मौलि से ही लिखा गया था।३६-३७। उन आठ देवताओं के नाम हैं-अलसा- कृपणा-दीना-नितन्द्रा-प्रमीलिका-क्लीवा-निरहंकारा-ये आठ देवता कहे गये हैं।३८। इन देवताओं के अष्टक को शूलाष्टक पुट के ऊपर नियोजित