भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

पृष्ठ 824, कुल 893 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 824

भंडासुर वध वर्णन ] [ ४१५

वे जलते हुए आदित्य के समान दीप्त थे और दीपों के प्रहरणों से उद्धत थे। उसने शक्तियों की सेना का मर्दन किया था और प्रह्लाद का भी मर्दन किया था ।९६। जो प्रह्लाद शक्तियों का था वह परमानन्द लक्षण वाला ही था। वह ही एक बालक होकर हिरण्याक्ष के द्वारा परिपीड़ित हुआ था ।१००। वह ललिता के शरण में प्राप्त हो गया था। राज्ञी ने उस पर कृपा की थी। इसके पश्चात् शक्तियों के आनन्द स्वरूप प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए ।१०१। ललिता देवी ने दाहिने हाथ की अनामिका को हिलाया था। उससे जटाओं के जाल को हिलाने वाले—तीन नेत्रों से युक्त जो जाज्वल्यमान थे—सिंह के मुख वाले—पुरुषाकार और कण्ठ के नीचे जनार्दन—कारुद्र के रूप वाले—नखों के आयुधों से संयुत घोर अट्टहास वाले उत्पन्न हुए थे ।१०२-१०३। उनकी भुजाएँ सहस्रों की संख्या में थीं और वे ललिता की आज्ञा के पालक थे। जो भण्ड की भौंहों से समुत्पन्न हिरण्यकशिपु थे ।१०४। उन सबको क्षणभर में कुलिश के समान कर्कश नखों से विदीर्ण कर दिया था। फिर ललिता देवी ने सब देवों के विनाशक एक महान् घोर बलीन्द्रास्त्र को प्रत्येक भंड महासुर के प्रति छोड़ा था ।१०५।

तदस्त्रदर्पनाशाय वामनाः शतशोऽभवन् । महाराज्ञीदक्षहस्तकनिष्ठाग्रान्महौजसः ॥१०६ क्षणे क्षणे वर्धमानाः पाशहस्ता महाबलाः । बलींद्रानस्त्रसंभूतान्वध्नंतः पाशबन्धनैः ॥१०७ दक्षहस्तकनिष्ठाग्राज्जाताः कामेशयोषितः । महाकाया महोत्साहास्तदस्त्रं समनाशयन् ॥१०८ हैहयास्त्रं समसृजद्भंडदैत्यो रणाजिरे । तस्मात्सहस्रशो जाताः सहस्रार्जुनकोटयः ॥१०६ अथ श्रीललितावामहस्तांगुष्ठनखादितः । प्रज्वलन्भार्गवो रामः सक्रोधः सिंहनादवान् ॥११० धारया दारयन्नेतान्कुठारस्य कठोरया । सहस्रार्जुनसंख्यातान्क्षणादेव व्यनाशयन् ॥१११