भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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४२२ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

भंडासुर के प्रबल बाणों की अग्नि से संतप्त हो गयी थी । सूर्य के अस्त होने पर प्रथित प्रभाव वाली उसने जो श्री देवता थी अपने शिविर में बुला लिया था ।१४६। हे तपोधनेन्द्र ! जो भी कोई पुरुष ललिताम्बा के द्वारा किये गये इस भंडासुर के वध को एक बार भी पढ़ता है उसके सब दुःख विनष्ट हो जाते हैं और उसको आठ सिद्धियों की प्राप्ति होती है तथा भुक्ति और मुक्ति दोनों ही उसके हाथ में होती है ।१४७। यह पवित्र ललिता का पराक्रम समस्त पापों का नाशक और अशेष सिद्धियों का दाता है । जो मनुष्य पुण्य दिनों में इसको पढ़ते हैं वे उत्तम भाग्य की समृद्धि को प्राप्त किया करते हैं ।१४८।

॥ मदन पुनर्भव वर्णन ॥

अगस्त्य उवाच— अश्वानन महाप्राज्ञ श्रुतमाख्यानमुत्तमम् । विक्रमो ललितादेव्या विशिष्टो वर्णितस्त्वया ॥१॥ चरितैरनघैर्देव्याः सुप्रीतोऽस्मि हयानन । श्रुता सा महती शक्तिर्मंत्रिणीदण्डनाथयोः ॥२॥ पश्चात्किमकरोत्तत्र युद्धानन्तरमंबिका । चतुर्थदिनशर्वर्यां विभातायां हयानन ॥३॥ हयग्रीव उवाच— शृणु कुम्भज तत्प्राज्ञ यत्तया जगदम्बया । पश्चादाचरितं कर्म निहते भंडदानवे ॥४॥ शक्तीनामखिलं सैन्यं दैत्यायुधशतार्दितम् । मुहुराह्लादयामास लोचनैरमृताप्लुतैः ॥५॥ ललितापरमेशान्याः कटाक्षामृतधारया । जुहुयुं द्धपरिश्रांति शक्तयः प्रीतिमानसाः ॥६॥ अस्मिन्नवसरे देवा भंडमर्दनतोषिताः । सर्वेऽपि सेवितुं प्राप्ता ब्रह्मविष्णुपुरोगमाः ॥७॥