भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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४२६ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

करने वाली हैं तथा प्रमथ के द्वारा सेवन करने के योग्य हैं ।२०। हे नित्ये ! आपकी दया का प्रपञ्च निरांतक है। आपके नीले अलकों की श्रेणियाँ हैं। आपको बारम्बार नमस्कार है। अनंग पुष्पादि एवं उन्मदा अनंग देवियों के द्वारा आप निरन्तर सेवन के योग्य रहती हैं। हे अभव हन्त्रि ! हे अक्षर-राशि रूपे ! आपने समस्त शत्रुओं को निहत कर दिया है। हे ललिते ! आपको हमारा नमस्कार है ।२१।

संक्षोभिणीमुख्यचतुर्दशार्चिर्मालावृतोदारमहाप्रदीप्ते ।
आत्मनमाबिभ्रति विभ्रमाढ्ये शुभ्राश्रये
शुभ्रपदे नमस्ते ॥२२
सशर्वसिद्धादिकशक्तिवन्द्ये सर्वज्ञविज्ञातपदारविन्दे ।
सर्वाधिके सर्वगते समस्तसिद्धिप्रदे श्रीललिते नमस्ते ॥२३
सर्वज्ञजातप्रथमाभिरन्यदेवीभिरप्याश्रितचक्रभूमे ।
सर्वामराकांक्षितपूरयित्रि सर्वस्य लोकस्य सवित्रि पाहि ॥२४
वन्दे वशिन्यादिकवाग्विभूते वर्द्धिष्णुचक्रद्युतिवाहवाहे ।
बलाहकश्यामकचे वचोऽब्धे वरप्रदे सुन्दरि पाहि
विश्वम् ॥२५
बाणादिदिव्यायुधसार्वभौमे भंडासुरानीकवनांतदावे ।
अत्युग्रतेजोज्ज्वलितांबुराशे प्रसेव्यमाने परितो नमस्ते ॥२६
कामेशि वज्रेशि भगेश्य रूपे कन्ये कले कालविलोपदक्षे ।
कथाविशेषीकृतदैत्यसैन्ये कामेशजांते कमले नमस्ते ॥२७
बिन्दुस्थिते बिन्दुकलैक रूपे विद्यात्मिके बृंहितचित्प्रकाशे ।
बृहत्कुचांभोजविलोलहारे वृहत्प्रभावे ललिते नमस्ते ॥२८

आप संक्षोभिणी प्रभृति जिनमें मुख्य हैं ऐसी अर्चि मालाओं से समा-वृत उदार महान प्रदीप्त वाली हैं हे विभ्रमाढ्ये ! आप आत्मा को आवि-भरण करती हैं। आपका शुभ्र आश्रय है। हे शुभ्रपदे ! आपको नमस्कार है ।२२। शम्भु के सहित सिद्ध आदि शक्तियों से आप वन्द्यमान हैं। आपका चरण कमल सर्वज्ञ के द्वारा ही विज्ञात है। आप सबसे बड़ी हैं—आप सबमें विद्यमान हैं और आप सब सिद्धियों के प्रदान करने वाली हैं। हे श्री