संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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सम्पूर्ण विश्व को सम्मोहित कर दिया था। वह देवों के इस कार्य को पूर्ण करके फिर श्रीपुर में चला गया था ।१०६। जहाँ पर परम पुण्य श्री नगर में परमेश्वरी ललिता जगतों की समृद्धि के वर्तमान रहती है। उसी की सेवा करने के लिए वह चला गया था ।१०७।
।। मतंग कन्या प्रादुर्भाव वर्णन ।।
अगस्त्य उवाच-
किमिदं श्रीपुरं नाम केन रूपेण वर्तते ।
केन वा निर्मितं पूर्वं तत्सर्वं मे निवेदय ।।१
कियत्प्रमाणं किं वर्णं कथयस्व मम प्रभो ।
त्वमेव सर्वसन्देहपङ्कशोषणभास्करः ।।
हयग्रीव उवाच-
यथा चक्ररथं प्राप्य पूर्वोक्तैर्लक्षणैर्युतम् ।
महायागानलोत्पन्ना ललिता परमेश्वरी ।।३
कृत्वा वैवाहिकीं लीलां ब्रह्माद्यैः प्रार्थिता पुनः ।
व्यजेष्ट भण्डनामानमसुरं लोककण्टकम् ।।४
तदा देवा महेन्द्राद्याः सन्तोषं बहु भेजिरे ।
अथ कामेश्वरस्यापि ललितायाश्च शोभनम् ।
नित्योपभोगसर्वार्थं मन्दिरं कर्तुं मुत्सुकाः ।।५
कुमारा ललितादेव्या ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः ।
वर्धकिं विश्वकर्माणं सुराणां शिल्पकोविदम् ।।६
असुराणां शिल्पिनं च मयं मायाविचक्षणम् ।
आहूय कृतसत्कारानूचिरे ललिताज्ञया ।।७
अगस्त्यजी ने कहा—यह श्रीपुर नाम वाला क्या है और यह किस स्वरूप से होता है। पूर्व में इसका निर्माण किसने किया था—यह सब आप कृपया मुझको बतला दीजिए ।१। यह श्रीपुर कितना बड़ा है और इसका क्या वर्ण है—हे प्रभो ! यह सभी कुछ बतलाइए । आप ही एक ऐसे हैं जो