संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयुग संख्यावर्ती ] [ ६७
हैं। और जो दक्षिण में होने वाले दूसरे जनपद हैं उनका भी ज्ञान प्राप्त करलो ।५७-५६। सूर्पारिक-कलिवन-गुर्गल-कुन्तल-पौलेय-किरात-रूपक-तापक-करीति और सब करन्धर और नासिक तथा जो अन्य नर्मदा के अन्तर में हैं ।६०-६१। सहकच्छ-समाहेय-सारस्वत-कच्छिप-सुराष्ट्र-आनर्त-अर्बुद—ये सब और अपरान्त जो विन्ध्य के वास करने वाले हैं उनको आप सुनिये। मलद-करुष-मेकल-उत्कल-ये जनपद विन्ध्य के वास करने वाले हैं। ।६२-६३।
उत्तमानां दशार्णाश्च भोजाः किष्किन्धकैः सह ।
तोशलाः कोशलाश्चैव त्रैपुरा वैदिशास्तथा ॥६४
तुहुण्डा बर्वराश्चैव षट्पुरा नैषधै-सह ।
अनूपास्तुं डिकेराश्च वीतिहोत्रा ह्यवंतयः ॥६५
एते जनपदाः सर्वे विन्ध्यपृष्ठनिवासिनः ।
अतो देशान्प्रवक्ष्यामि पर्वताश्रयिणश्च ये ॥६६
निहीरा हंसमार्गाश्च कुपथास्तंगणा शकाः ।
खपप्रावरणाश्चैव ऊर्णा दर्वाः सहूहूकाः ॥६७
त्रिगर्त्ता मंडलाश्चैव किरातास्तामरैः सह ।
चत्वारि भारते वर्षे युगानि ऋषयोऽब्रुवन् ॥६८
कृतं त्रेतायुगं चैव द्वापरं तिष्यमेव च ।
तेषां निसर्गं वक्ष्यामि उपरिष्टादशेषतः ॥६९
उत्तमों के दशार्ण-भोज-किष्किन्धक-तोशल-कोशल-त्रैपुर-वैदिश—तुहुण्ड—वर्वर—षट्पुर—नैषध—अनूप—तुण्डिकेर—वीतिहोत्र-अवन्ति—ये सब जनपद विन्ध्य गिरि के ऊपर निवास करने वाले हैं। इसके आगे मैं उन देशों का वर्णन करूँगा जो पर्वतों का आश्रय ग्रहण करके निवास किया करते हैं ।६४-६६। निहीर-हंसमार्ग-कुपथ-तङ्गण-शक-अप प्रावरण-ऊर्ण-दर्व-सहूह्क-त्रिगर्त-मण्डल-किरात-तामर-ये समस्त देश पर्वतों के ऊपर समाश्रय लेने वाले हैं। ऋषियों ने भारतवर्ष में चार युगों का होना बतलाया था। प्रथम कृतयुग अर्थात् सत्ययुग है—दूसरा त्रेता, तीसरा द्वापर और चौथा तिष्य है। इन सबका निसर्ग ऊपर से ही सम्पूर्ण मैं आपको बतलाऊँगा ।६७-६९।