ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २२५ ) ग्रहणे यथा¹ रवीन्द्वोः स्पष्टीकरणाच्च मुक्तवत्कृत्वा² एवं पर्वज्ञानं ग्रहणज्ञानं³ स्फुटं गणितात् ॥ ३३ ॥ चत्वारि त्रयुवर्त्तं¹ ग्रहणान्यर्कस्य² सप्तचन्द्रस्य⁴ । द्रष्टो³दयास्तमययोर्क⁵रात्रिदलयोश्च केंद्रस्य ॥ ३४ ॥ सर्वपादानांमंतो¹ तिष्यंतं³ज्ञानमिंदुभास्करयोः । ग्रहणे च क्ते² स्पष्टे जिष्णुसुतब्रह्मगुप्तेन ॥ ३५ ॥
३३. (ग) १. यथरविद्वोः for (यथा रवीन्द्वोः)
२. ज्ञात्वा for (कृत्वा) ३. “ग्रहणज्ञानं” लुप्त पद हैं
(च) ३. ग्रहणज्ञानस्फुटं for (ग्रहणज्ञानं स्फुटं)
(ङ) २. मुक्तवज् ज्ञात्वा for (मुक्तवत् कृत्वा)
३४. (घ) १. त्रपुवर्त्त (ग) त्रपुवत्त for (त्रयुवर्त्तं)
२. ग्रहणान्यर्कस्य (