ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 615, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 615
( २२६ ) परिलेखो^१ वलिनज्या^५ विक्षेपाद्येषु षोडषोऽध्यायः^२ । गृहणोत्तरमर्केन्द्वोः^३ षट्चत्वारिंशदार्याणाम् ॥ ४७ ॥ ^४इत्ति श्री ब्रह्मगुप्ते ग्रहणाधिकारः षोडशोऽध्यायः समाप्तः
४७. (घ) १. परिलेषो (ग) परिलेष for (परिलेखो)
२. षोडशोऽध्यायः (ङ) for (षोडषोऽध्यायः)
३. मर्केन्द्रो for (मर्केन्द्वोः)
४. 'इति' से 'समाप्तः' तक पाठ अंकित नहीं ।
(ग) ५. वलन for (वलिन)
४. इति श्री ब्रह्मसिद्धांते ग्रहणोत्तराध्यायः षोडशः for (इति श्री ब्रह्मगुप्ते
ग्रहणाधिकारः षोडशोऽध्यायः समाप्तः)
(च) १. परिलेषो for (परिलेखो) ५. वलनद्या for (वलिनज्या)
२. षोडशो for (षोडषो) ३. मर्केंन्द्रोः for (मर्केन्द्वोः)
४. 'इति' से 'समाप्तः' तक लुप्त ।
(ङ) १. परिलेख for (परिलेखो) ५. वलनजीवा for (वलिनज्या)
४. इति श्री ब्राह्मस्फुट सिद्धान्ते ग्रहणोत्तराध्यायः षोडशः for (इति श्री ब्रह्म-
गुप्ते ग्रहणाधिकारः षोडषोऽध्यायः समाप्तः)