ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
पृष्ठ 616, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ें( २३० ) अथ शृङ्गोन्नत्युत्तराध्यायः सप्तदशः भुजकोटिशशिमान शुक्लपरिलेखे सूत्रपरिलेखां । प्रतिदिवसं प्रतिघटिकं यो वेत्तींदुद यज्ञः सः ॥ १ ॥ पराच्य परादिगभिमुखं शुक्लेतरपक्षयोर्लिखेतं भूमौ । अपवर्त्तेष्टेनेकेन राशिना कोटिभुजकर्णात् ॥ २ ॥ परिकल्पार्कं बिन्दु तस्माद्बाहुं यथादिशं कृत्वा । बाहुग्रात्प्राच्यपरां कोटिं तिर्यकथं कर्णः ॥ ३ ॥ १. (घ) १. छेदभुजकोटिकर्णशशि (ग) भुजकोटिकर्णशशि for (भुजकोटिशशि) २. परिलेष for (परिलेख) (ग) 'परिलेख' लुप्त है । ३. परिलेषान् (ग) परिलेखात् for (परिलेखान्) (ग) ४. वेत्तं for (वेत्ती) ५. हृदयज्ञः for (दुंदयज्ञः) (च) १. भुजकोटि कर्णशशिमान for (भुजकोटिशशिमान) २. परिलेष for (परिलेख) ३. परिलेषान् for (परिलेखान्) ४. वेत्तीदूंदं for (वेत्तींदुद) (ङ) २. सित for (परिलेख) ३. लेखात् for (लेखान्) ४. वेत्ति for (वेत्ती) ५. स तन्त्रहृदयज्ञः for (दुंदयज्ञः सः) २. (घ) १. प्राच्य (ग) (च) (ङ) for (पराच्य) २. मुंषं for (मुखं) ३. लिषेत (ग) लिखेद्धूमौ for (लिखेत भूमौ) ४. कर्णान् (ङ) (च) for (कर्णात्) (ग) ५. पदिगभि मुखं for (परादिगभिमुखं) ६. तरतर for (तर) ७. अपवर्त्यैकेनेष्टेन (ङ) for (अपवर्त्तेष्टेनेकेन) ८. वाशिना for (राशिना) (च) २. मुंषं for (मुखं) ३. लिषेत् for (लिखेत) (ङ) ४. लिखेत् (लिखेत) ३. (घ) १. बाह्वग्रात् (ग) (ङ) for (बाहुग्रात्) २. तिर्यक् स्थतं (ग) तिर्यक्स्थितं कर्णम् ॥ ३ ॥ (ग) ३. बिंदुं (ङ) for (बिन्दु) ४. यथादिशि (यथादिशं) ५. कोटि for (कोटिं) (च) ६. परिकल्पाक्कं for (परिकल्पार्कं) २. तिर्यक्स्थं for (तिर्यकथं) (ङ) ६. परिकल्प्यार्कं for (परिकल्पार्कं) ७. दत्वा for (कृत्वा) २. तिर्यक्स्थितंकर्णं for (तिर्यकथं कर्णः)