ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४५ ) धनभक्तं धनमृणहृतं मृणं धन भवति खंखभक्तम् । खंभक्तमृणे धनधनमृणधनेन हतमृणमृणं भवति ॥ ३५ ॥ खोद्धृतमृणधनं वा तच्छेद खमृणधन विभक्तं वा । धनमृणधनयोर्वर्गः खं खस्यपदं कृतियत्तत ॥ ३६ ॥ योगोन्तर युतहीनो द्विहतः संक्रमणमंतरविभक्तम् । वर्गान्तरमंतर युतहीनं द्विहतं विषमकर्म ॥ ३७ ॥ ३५. (ख) (वि०—इस श्लोक की दूसरी पंक्ति का आरंभिक 'ख' पहली पंक्ति का अंतिम शब्द है) १. हतमृणं (ग) (ङ) (च) for (हतंमृणं) २. धनं (ग) (च) (ङ) for (धन) ३. मृणं (ग) (च) (ङ) for (मृण) ४. हृत (ग) (च) (ङ) for (हत) (वि०—इसका संख्याक्रम ३६ लिखा है) (ग) ५. भक्तं खम् । यहां 'खं' पहली पंक्ति का अंतिम पद है। दूसरी पंक्ति 'भक्त' से आरम्भ होती है। इसकी क्रमसंख्या ३४ है । (ङ) ६. मृणेन (ङ) for (भक्तमृणे) ७. 'धन' यह पद लुप्त है (ङ) ८. मृणधनं भवति for (मृणमृणं) (च) १. यहां क्रमसंख्या '३६' अंकित है। ३६. (घ) १. वाः for (वा) (वि०—इसका संख्याक्रम ३७ लिखा है) (ग) २. कृतियत्कृत् for (कृतियत्तत्) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ३५ है) (च) ३. (वि०—यहाँ क्रमसंख्या ३७ अंकित है) (ङ) ४. मृणं for (मृण) ५. तच्छेदं for (तच्छेद) ६. ऋणधनयो for (धनमृणधनयो) ७. स्वं खं for (खं) २. र्यत्तत् for (यत्तत्) ३७. (घ) १. हृतः (ग) (च) (ङ) for (हतः) २. वर्गान्तिर (ग) (च) (ङ) for (वर्गान्तर) ३. हृतं (ग) (च) (ङ) for (हतं) ४. कर्म्मः (ग) (च) for (कर्म) (वि०—इसका संख्याक्रम ३८ लिखा है) (ग) ५. युतहिनो for (युतहीनो) (वि०—इसकी श्लोक संख्या ३६ है) (च) ६. (वि०—यहां क्रमसंख्या ३८ अंकित है) (ङ) ७. +वा+