भारतकोश
बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,402 पृष्ठ

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विषयपृष्ठ
२२-प्राणके आङ्गिरसत्वकी उपपत्ति ...... १३८
२३-प्राणके बृहस्पतित्वकी उपपत्ति ... ...... १४०
२४-प्राणके ब्रह्मणस्पतित्वकी उपपत्ति ...... १४२
२५-प्राणके सामत्वकी उपपत्ति ... ...... १४४
२६-प्राणके उद्गीथत्वकी उपपत्ति... ....... १४७
२७-उक्त अर्थकी पुष्टिके लिये आख्यायिका ...... १४८
२८-सामके स्वभूत स्वरको सम्पादन करनेकी आवश्यकता ...... १५०
२९-सामके सुवर्णको जाननेका फल ...... १५२
३०-सामके प्रतिष्ठागुणको जाननेवालेका फल ...... १५३
३१-प्राणोपासकके लिये जपका विधान ...... १५५

चतुर्थ ब्राह्मण

विषयपृष्ठ
३२-ग्रन्थ-सम्बन्ध .... ...... १६३
३३-प्रजापतिके अहंनामा होनेका कारण और उसकी इस प्रकार उपासना करनेका फल ... ...... १६४
३४-प्रजापतिका भय और विचारद्वारा उसकी निवृत्ति ...... १६८
३५-प्रजापतिसे मिथुनकी उत्पत्ति ... ...... १७५
३६-मिथुनके द्वारा गवादि प्रपञ्चकी सृष्टि ...... १७८
३७-प्रजापतिकी सृष्टिसंज्ञा और सृष्टिरूपसे उसकी उपासना करनेका फल...... १८०
३८-प्रजापतिकी अग्न्यादिदेवरूप अतिसृष्टि ...... १८१
३९-अव्याकृत कारण ब्रह्मसे व्यक्त जगत्की उत्पत्ति, दोनोंका अभेद और इस अभेदोपासनाका फल ...... १९०
४०-निरतिशय प्रियरूपसे आत्माकी उपासना ...... २३६
४१-ब्रह्मने सर्वरूप होनेके विषयमें प्रश्न ....... २३६
४२-ब्रह्मने क्या जाना ?—इसका उत्तर और उस प्रकार जाननेका फल...... २४३
४३-क्षत्रियसर्ग तथा ब्राह्मणजातिके साथ उसके सम्बन्धका वर्णन ...... २५६
४४-वैश्यजातिकी उत्पत्ति ... ...... २६०
४५-शूद्रवर्णकी उत्पत्ति ... ...... २६१
४६-धर्मकी उत्पत्ति और उसके प्रभाव एवं स्वरूपका वर्णन ...... २६२
४७-आत्मोपासनकी आवश्यकता ... ...... २६४
४८-कर्माधिकारी जीव किन-किन कर्मोंके कारण समस्त प्राणियोंका लोक है ? ... ...... ३०५
४९-प्रवृत्तिके बीजभूत काम और पाङ्क्तकर्मका वर्णन ...... ३११