बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 20, कुल 1402 में से
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विषय
७२—गार्ग्यद्वारा आकाश-ब्रह्मका उपदेश और अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४११
७३—गार्ग्यद्वारा वायु-ब्रह्मका प्रतिपादन तथा अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४१२
७४—गार्ग्यद्वारा अग्नि-ब्रह्मका प्रतिपादन तथा अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४१३
७५—गार्ग्यद्वारा जलान्तर्गत ब्रह्मका प्रतिपादन तथा अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४१४
७६—गार्ग्यद्वारा आदर्शान्तर्गत ब्रह्मका प्रतिपादन और अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... .... ... ४१४
७७—गार्ग्यद्वारा प्राण-ब्रह्मका प्रतिपादन और अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४१५
७८—गार्ग्यद्वारा दिग्ब्रह्मका प्रतिपादन और अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४१६
७९—गार्ग्यद्वारा छाया ब्रह्मका प्रतिपादन और अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४१७
८०—गार्ग्यद्वारा देहान्तर्गत ब्रह्मका प्रतिपादन और अजातशत्रुद्वारा उसका प्रत्याख्यान ... ... ... ४१८
८१—गार्ग्यका पराभव और अजातशत्रुके प्रति उसकी उपसत्ति ... ४१६
८२—गार्ग्यका हाथ पकड़कर अजातशत्रुका एक सोये हुए पुरुषके पास जाना और प्राणोंके नामसे न उठनेपर उसे हाथ दबाकर जगाना ... ... ... ४२१
८३—सुषुप्तिमें विज्ञानमयकी स्थितिके विषयमें अजातशत्रुका प्रश्न ... ४३६
८४—विज्ञानात्माके शयनस्थानका प्रतिपादन तथा स्वपितिशब्दका निर्वचन ... ... ... ४३६
८५—स्वप्नवृत्तिका स्वरूप ... ... ... ४४२
८६—सुषुप्तिका स्वरूप ... ... ... ४४८
८७—आत्मासे जगत्की उत्पत्तिमें ऊर्णनाभि और अग्नि-विस्फुलिङ्गका दृष्टान्त ... ... ... ४५७
द्वितीय ब्राह्मण
८८—शिशुसंज्ञक मध्यम प्राणका उसके उपकरणोंसहित वर्णन ... ५०२
८९—मध्यम प्राणरूप शिशुके नेत्रान्तर्गत सात अक्षतियाँ ... ५०६