बृहदारण्यकोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Brihadaranyaka Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 896, कुल 1402 में से
संदर्भ में पढ़ें| ५८२ | बृहदारण्यकोपनिषद् | [ अध्याय ४ |
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| रथमात्रम्—विलक्षणमात्मज्योतिः सिद्धमिति ।<br><br>कार्यकरणसंघातभावभावित्वा-<br><br>आत्मनः संघात- च्च संघातधर्मत्वम्<br>साधर्म्यं युक्त्य- अनुमीयते ज्योतिषः<br>न्तरम् सामान्यतो दृष्टस्य<br><br>चानुमानस्य व्यभिचारित्वादप्रामाण्यम्; सामान्यतो दृष्टबलेन | ज्योति इनसे विलक्षण है—यह सिद्ध होता है' ऐसा कहना तुम्हारी मनमानी कल्पनामात्र है।<br><br>इसके सिवा देहेन्द्रियसंघातके रहनेपर ही रहती है, इसलिये यह चैतन्यज्योति [रूप आदिके समान] संघातका ही धर्म है, ऐसा भी अनुमान होता है। सामान्यतो दृष्ट अनुमान व्यभिचारी³ होता है, इसलिये उसकी प्रामाणिकता स्वीकार नहीं की जा सकती। आप सामान्यतो दृष्ट अनुमानके बलसे ही तो |
१. अनुमान वाक्य इस प्रकार है—चैतन्यं शरीरधर्मः, तद्भावभावित्वात्, रूपवत् ।
२. अनुमान साधारणतः तीन प्रकारका होता है—१. पूर्ववत्, २. शेषवत् और ३. सामान्यतो दृष्ट। कारण देखकर जो कार्यका अनुमान किया जाता है, वह 'पूर्ववत्' है, जैसे मेघकी घिरी हुई घटा देखकर वृष्टिका अनुमान। कार्य देखकर जो कारणका अनुमान होता है, वह 'शेषवत्' कहलाता है; जैसे नदीमें बाढ़ आयी देखकर पर्वतपर वृष्टि होनेका अनुमान। तथा प्रत्यक्षमूलक साधारण नियम या व्याप्तिके अनुसार जो परोक्षवस्तुका अनुमान किया जाता है, वह सामान्यतो दृष्ट अनुमान है; जैसे प्रत्येक कार्यका एक कर्ता देखा जाता है, चूँकि यह जगत् भी एक कार्य है, अतः इसका भी एक कर्ता अवश्य होगा। जो इसका कर्ता है, वही ईश्वर है। यहाँ 'विमतं चैतन्यज्योतिः संघाताद् भिन्नम् तद्भासकत्वात् आदित्यादिवत्' (विवादकी विषयभूत चैतन्यज्योति संघातसे भिन्न है; क्योंकि यह संघातको प्रकाशित करनेवाली है, जैसे आदित्य)—इस प्रकार 'प्रकाशक प्रकाश्यसे भिन्न होता है, इस व्याप्तिके अनुसार परोक्ष 'चैतन्यज्योति' को संघातसे भिन्न सिद्ध किया जा रहा है; अतः यह सामान्यतो दृष्ट अनुमान है।
३. नेत्र देहका प्रकाशक होकर भी देहसे पृथक् नहीं है; अतः संघातकी प्रकाशिका होनेके कारण जो चैतन्यज्योतिको संघातसे भिन्न सिद्ध करते हैं, उनका यह हेतु नेत्र आदिके विषयमें अनैकान्तिक (व्यभिचरित) हो गया है—इसी युक्तिसे पूर्वपक्षीने सामान्यतो दृष्ट अनुमानको व्यभिचारी कहा है।