बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअथ द्वादशोऽध्यायः नारद उवाच श्रुतं तु गङ्गामाहात्म्यं वाञ्छितं पापनाशनम् । अधुना लक्षणं ब्रूहि भ्रातर्मे दानपात्रयोः ॥१॥ सनक उवाच सर्वेषामेव वर्णानां ब्राह्मणः परमो गुरुः। तस्मै दानानि देयानि दत्तस्यानन्त्यमिच्छता ॥२॥ ब्राह्मणः प्रतिगृह्णीयात्सर्वतो भयवर्जितः । न कदापि क्षत्रविशौ गृह्णीयातां प्रतिग्रहम् ॥३॥ चण्डस्य पुत्रहीनस्य दम्भाचाररतस्य च । स्वकर्मत्यागिनश्चापि दत्तं भवति निष्फलम् ॥४॥ परदाररतस्यापि परद्रव्याभिलाषिणः । नक्षत्रसूचकस्यापि दत्तं भवति निष्फलम् ॥५॥ असूयाविष्टमनसः कृतघ्नस्य च मायिनः । अयाज्ययाजकस्यापि दत्तं भवति निष्फलम् ॥६॥ नित्यं याच्ञापरस्यापि हिंसकस्य खलस्य च । रसविक्रयिणश्चैव दत्तं भवति निष्फलम् ॥७॥ वेदविक्रयिणश्चापि स्मृतिविक्रयिणस्तथा । धर्मविक्रयिणो विप्र दत्तं भवति निष्फलम् ॥८॥ गानेन जीविका यस्य यस्य भार्या च पुंश्चली । परोपतापिनश्चापि दत्तं भवति निष्फलम् ॥६॥ असिजीवी मषीजीवी देवलो ग्रामयाजकः । धावको वा भवेत्तेषां दत्तं भवति निष्फलम् ॥१०॥ अध्याय १२ धर्माख्यान-प्रसंग नारद बोले- भाई ! पापों को नष्ट करने वाले अभीष्ट गंगा-माहात्म्य को तो सुन लिया, अब दान और दानयोग्य पात्रों का लक्षण कहिये ॥१॥ सनक बोले- ब्राह्मण सब वर्णों का परमश्रेष्ठ गुरु माना गया है। इसलिए अपने दान को अनन्त बनाने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को ब्राह्मण को अवश्य दान देना चाहिए। ब्राह्मण बिना किसी प्रकार के भय के सबसे दान ले सकता है। क्षत्रिय और वैश्य कभी भी दान न लें । अत्यन्त क्रोधी, पुत्रहीन, पाखण्ड में लीन रहने वाले और अपने कर्त्तव्य से विमुख व्यक्ति को दिया हुआ दान व्यर्थ होता है। परस्त्रीगामी, परद्रव्य-लोभी और ज्योतिषी को दिया हुआ दान व्यर्थ हो जाता है। ईर्ष्यालु, कृतघ्न, मायावी और अनधिकारी को यज्ञ कराने वाले को दान देना व्यर्थ हो जाता है । सर्वदा भिक्षा मांगने वाले, हिंसक, दुष्ट और रस बेचने वाले को दिया हुआ दान व्यर्थ जाता है ॥२-७॥ वेद-विक्रयी, स्मृति और धर्म के विक्रेता (पैसे लेकर वेद-स्मृति और धर्म का उपदेश करने वाले) ब्राह्मण को दान देना निष्फल होता है। गाकर जीविका चलाने वाला, जिसकी भार्या आचारहीन हो और जो दूसरो को पीड़ा पहुँचावे ऐसे विप्र को दान देना व्यर्थ होता है। तलवार के सहारे जीने वाले (सैनिक), लिपिक (क्लर्क), पुजारी, ग्राम पुरोहित और हरकारे को दिया हुआ दान निष्फल होता है ॥८-