बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 350, कुल 1008 में से
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एकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ३३१ ऋभुरुवाच नराधिपोऽत्र कतमः कतमश्चेतरो जनः । कथ्यतां मे द्विजश्रेष्ठ त्वमभिज्ञो मतो मम ॥७४॥ निदाघ उवाच योऽयं गजेन्द्रमुन्मत्तमद्रिशृंगसमुच्छ्रयम् । अधिरूढो नरेन्द्रोऽयं परितो यस्तथेतरः ॥७५॥ ऋभुरुवाच एतौ हि गजराजानौ दृष्टौ हि युगपन्मया । भवता निर्विशेषेण पृथग्वेदोपलक्षितौ ॥७६॥ तत्कथ्यतां महाभाग विशेषो भवतानयोः । ज्ञातुमिच्छाम्यहं कोऽत्र गजः को वा नराधिपः ॥७७॥ निदाघ उवाच गजो योऽयमधो ब्रह्मन्नुपर्यस्यैष भूपतिः । वाह्यवाहकसंबंधं को न जानाति वै द्विज ॥७८॥ ऋभुरुवाच ब्रह्मन्यथाहं जानीयां तथा मामवबोधय । अधः सत्त्वविभागं किं किं चोर्ध्वमभिधीयते ॥७९॥ ब्राह्मण उवाच इत्युक्त्वा सहसारुह्य निदाघः प्राह तं ऋभुम् । श्रूयतां कथयाम्येष यन्मां त्वं परिपृच्छसि ॥८०॥ उपर्यहं यथा राजा त्वमधः कुंजरो यथा । अवबोधाय ते ब्रह्मन्दृष्टांतो दर्शितो मया ॥८१॥
ऋभु बोले—इसमें नरेन्द्र कौन हैं और इतर जन कौन हैं, द्विजवर ! आप बताइए, जान पड़ता है कि आप अवश्य भली-भाँति परिचित हैं ॥७४॥ निदाघ बोला—जो पहाड़ की चोटी के समान ऊँचे मतवाले गजेन्द्र पर बैठे हुए हैं वे नरेन्द्र हैं और उनके चारों ओर इतर जन हैं ॥७५॥ ऋभु बोले—मैंने इन दोनों गजराज और राजा को पहले एक साथ ही देख लिया और आपने तो पृथक्-पृथक् भली भाँति देखा है तो महाभाग ! आप कुछ इन दोनों की विशेषता बतलाइए । मैं तो यह जानना चाहता हूँ कि कौन गज है और कौन राजा ॥७६-७७॥ निदाघ ने कहा—ब्रह्मन् ! जो नीचे है वह तो हाथी है और इसके ऊपर जो स्थित है वह राजा है। द्विज ! इस छोटी सी बात को-वाह्य-वाहक संबन्ध को कौन नहीं जानता ? ॥७८॥ ऋभु बोले--ब्रह्मन् ! जिस प्रकार मैं भली भाँति जान सकूँ उस प्रकार मुझे समझाओ । यहाँ दोनों पदार्थ में विभाग कैसे किया जाय ? इसलिए बतलाओ कि किसको अधः (नीचे) कहा जाय और किसको ऊर्ध्व (ऊपर) ॥७९॥ ब्राह्मण बोला--यह कह कर निदाघ एकाएक ऋभु के ऊपर चढ़ गया और कहा—सुनो बता रहा हूँ जो तुम मुझसे पूछ रहे हो । जिस प्रकार मैं ऊपर हूँ वैसे राजा हाथी के ऊपर है और तुम हाथी की भाँति नीचे हो । ब्रह्मन् ! तुमको भली भाँति समझाने के लिए यह दृष्टान्त के रूप में दिखलाया है ॥८०-८१॥