बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४२४ नारदीयपुराणम् शेतऽरिहंता व्यसनी स्त्रीजितो जाहिभेदिनी । बुध्ने वक्ता सुखी कांतः पौष्णे शूरो धनी शुचिः ॥२२०॥ कामी शूरः कृतज्ञोऽजे कांतस्त्यागी क्षमी वृषे । युग्मे स्त्रीद्यूतशास्त्रज्ञः स्त्रैणो ह्रस्वः स्वभे विधौ ॥२२१॥ स्त्रीद्विट् क्रोधी हरौ मानी विक्रांतः स्थिरधीः सुखी । धर्मी श्लक्ष्णः सुधीः षष्ठे प्राज्ञः प्रांशुर्धनी घटे ॥२२२॥ रोगी पूज्यः क्षती कौर्प्ये कविः शिल्पीज्यभे धनी । मृगेऽलसोऽटनः स्वक्षः परदारार्थहृद्धटे ॥२२३॥ सबलेभेभयेवापिसबलेऽखिलफलम् ॥ अन्यथा विपरीतं तत्फलमेवं परेऽपि न । ख्यातः स्त्रीद्विट् धनी तीक्ष्णोज्ञः कविः शौंडिको धनी ॥२२४॥ पूज्यो लुब्धोऽधनसखो मेषादौ भास्करे जनौ । निःस्वोऽर्कभे भूमिपुत्रे धनी चांद्रे स्वभेदनः । बौधे कृतज्ञो जैवे तु ख्यातः शौक्रेऽन्यदारिकः ॥२२५॥
धनवान् होता है । शतभिषा में शत्रु को जीतने वाला व्यसन में आसक्त, पूर्व भाद्रपद में स्त्री के वशीभूत और धनवान्; उत्तरभाद्रपद में वक्ता, सुखी और सुन्दर तथा रेवती में जन्म लेने वाला वीर, धनी और पवित्र हृदय वाला होता है ॥२१६-२२०॥ मेषादि चन्द्रराशि में जन्मराशि का फल- मेषराशि में जन्म लेने वाला कामी, और कृतज्ञ; वृष में सुन्दर, दानी और क्षमावान्; मिथुन में स्त्रीभोगासक्त, द्यूतविद्या को जानने वाला होता है । सिंहराशि में स्त्रीद्वेषी, क्रोधी, मानी, पराक्रमी, स्थिरबुद्धि और सुखी होता है । तुलाराशि में उत्पन्न मनुष्य पण्डित, ऊँचे कदवाला और धनवान् होता है । वृश्चिक राशि में उत्पन्न रोगी, लोक में पूज्य और क्षत (आघात) युक्त होता है । धनु में जन्म लेने वाला कवि, शिल्पज्ञ और धनवान्; मकर में उत्पन्न पुरुष कार्य करने में अनुत्साही, व्यर्थ घूमने वाला और सुन्दर नेत्रों से युक्त; कुम्भ में परस्त्री और परधन हरण करने के स्वभाव वाला तथा मीन में धनुसदृश (कवि और शिल्पज्ञ) होता है ॥२२१-२२३॥ यदि चन्द्रमा की राशि बली हो तथा राशि का स्वामी और चन्द्रमा दोनों बलवान् हों तो ऊपर कहे हुए फल पूर्ण रूप से संघटित होते हैं-ऐसा समझना चाहिए । अन्यथा विपरीत फल (अर्थात् निर्बल हों तो फल का अभाव या बल के अनुसार फल में भी तारतम्य) जानना चाहिए । इसी प्रकार अन्य ग्रहों की राशि के अनुसार फल का विचार करना चाहिए ॥२२३॥ सूर्यादि-ग्रह-राशि-फल-सूर्य यदि मेष राशि में हो तो जातक लोक में विख्यात होता है । वृष में हो तो स्त्री का द्वेषी, मिथुन में हो तो धनवान्, कर्क में हो तो उग्र स्वभाव वाला, सिंह में हो तो मूर्ख, कन्या में हो तो कवि, तुला में हो तो मद्यविक्रेता, वृश्चिक में हो तो धनवान्, धनु में हो तो लोकपूज्य, मकर में हो तो लोभी, कुम्भ में हो तो निर्धन और मीन में हो तो सुख हीन होता है ॥२२४॥ मंगल यदि सिंह में हो तो जातक निर्धन, कर्क में हो तो धनवान्, स्वगृह में (मेष, वृश्चिक) में हो तो भ्रमण- शील कन्या-मिथुन में हो तो कृतज्ञ, गुरुराशि (धनु-मीन) में हो तो विख्यात, शुक्रराशि (वृष-तुला) में हो तो पर- स्त्री में आसक्त, मकर में हो तो बहुत पुत्र और धनवाला तथा कुम्भ में हो तो दुःखी, दुष्ट और मिथ्या स्वभाव वाला होता है ॥२२५॥