बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 73, कुल 1008 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवमोऽध्यायः नारद उवाच शप्तः कथं वसिष्ठेन सौदासो नृपसत्तमः । गङ्गाबिन्दुभिषेकेण पुनः शुद्धोऽभवत्कथम् ॥१॥ सर्वमेतदशेषेण भ्रातर्मे वक्तुमर्हसि । शृण्वतां वदतां चैव गङ्गाख्यानं शुभावहम् ॥२॥ सनक उवाच सौदासः सर्वधर्मज्ञः सर्वज्ञो गुणवाञ्छुचिः । बुभुजे पृथिवीं सर्वां पितृवद्रञ्जयन्प्रजाः ॥३॥ सगरेण यथा पूर्वं महीयं सप्तसागरा । रक्षिता तद्वदमुना सर्वधर्माविरोधिना ॥४॥ त्रिंशदब्दसहस्राणि बुभुजे पृथिवीं युवा ॥५॥ सौदासस्त्वेकदा राजा मृगयाभिरतिर्वनम् । विवेश सबलः सम्यक् शोधितं ह्याप्तमन्त्रिभिः ॥६॥ निषादैः सहितस्तत्र विनिघ्नन्मृगसंचयम् । आसाद नदीं रेवां धर्मज्ञः स पिपासितः ॥७॥ सुदासतनयस्तत्र स्नात्वा कृत्वान्हिकं मुने । भुक्त्वा च मन्त्रिभिः सार्द्धं तां निशां तत्र चावसत् ॥८॥ ततः प्रातः समुत्थाय कृत्वा पौर्वाह्निकीं क्रियाम् । बभ्राम मन्त्रिसहितो नर्मदातीरजे वने ॥६॥ अध्याय ६ गंगाजल के सम्पर्क से राजा सौदास का शापोद्धार नारद बोले—वसिष्ठ ने सौदास को क्यों शाप दिया और पुनः गंगाजल के अभिषेक से वह कैसे शुद्ध हो गया ? भाई ! इस आख्यान को पूर्णरूप से आप कहिए, गंगा की कथा सुनने वाले और कहने वाले दोनों के लिए मङ्गलदायक होता है ॥१-२॥ सनक बोले—सौदास सब धर्मों का ज्ञाता, सर्वज्ञ, गुणी और सदाचारी था । उसने अपने पिता के समान प्रजा का पालन कर सम्पूर्ण पृथ्वी का उपभोग किया । जिस प्रकार प्राचीनकाल में इस सप्त-समुद्रा पृथ्वी की रक्षा सगर ने की थी उसी प्रकार इसने न्याय और धर्म पूर्वक पृथ्वी की रक्षा की । उस युवक ने अपने पुत्र- पौत्रों के साथ सब प्रकार के वैभवों का उपभोग करते हुए तीस हजार वर्षों तक पृथ्वो का शासन किया ॥३-५॥ एक दिन मृगया-प्रेमी राजा सौदास अपने सैनिकों के साथ वन में गया जिस वन की पहले से ही विश्वस्त मन्त्रियों ने भली भाँति परीक्षा कर ली थी । वह धर्मज्ञ राजा निषादों को साथ लेकर अनेकों जंगली पशुओं का शिकार करता हुआ प्यास से व्याकुल होकर गोदावरी नदी के तट पर गया ॥६-७॥ मुने ! सुदास- पुत्र ने नर्मदा में स्नान कर सन्ध्या-वन्दनादि नित्य क्रिया की और मंत्रियों के सहित भोजन कर उस रात को वहीं रह गया । तदनन्तर प्रातः काल उठकर प्रातःकालीन क्रियाओं को समाप्त कर मन्त्रियों के साथ नर्मदा