बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें७४८ नारदीयपुराणम् गोपिकामार्जितमुखो गोपोव्यंजनवीजितः । गोपिकाकेशसंस्कारी गोपिकापुष्पसंस्तरः ॥७२॥ गोपिकाहृदयालंबी गोपीवहनतत्परः । गोपिकामदहारी च गोपिकापरमार्जितः ॥७३॥ गोपिकाकृतसंनीलो गोपिकासंस्मृतप्रियः । गोपिकावन्दितपदो गोपिकावशवर्तनः ॥७४॥ राधापराजितः श्रीमान्निकुञ्जेसुविहारवान् । कुञ्जप्रिया कुञ्जवासी वृन्दावनविकासतः ॥७५॥ यमुनाजलसिक्तांगो यमुनासौख्यदायकः । शशिसंस्तंभनः शूरः कामी कामविमोहनः ॥७६॥ कामाद्यः कामनाथश्च काममानसभेदनः । कामदः कामरुपश्च कामिनीकामसंचयः ॥७७॥ नित्यक्रीडो महालीलः सर्वः सर्वगतस्तथा । परमात्मा पराधीशः सर्वकारणकारणः (म्) ॥७८॥ गृहीतनारदवचा ह्यक्रूरपरिचिंतितः । अक्रूरवन्दितपदो गोपिकातोषकारकः ॥७९॥ अक्रूरवाक्यसंग्राही मथुरावासकारणः (म्) । अक्रूरतापशमनो रजकायुःप्रणाशनः ॥८०॥ मथुरानन्ददायी च कंसवस्त्रविलुण्ठनः । कंसवस्त्रपरीधानो गोपवस्त्रप्रदायकः ॥८१॥ सुदामगृहगामी च सुदामपरिपूजितः । तंतुवायकसंप्रीतः कुब्जाचंदनलेपनः ॥८२॥ कुब्जारूपप्रदो विज्ञो मुकुंदो विष्टरश्रवाः । सर्वज्ञो मथुरालोकी सर्वलोकामिनंदनः ॥८३॥ कृपाकटाक्षदर्शी च दैत्यारिर्देवपालकः । सर्वदुःखप्रशमनो धनुर्भङ्गीमहोत्सवः ॥८४॥ कुवलयापीडहंता दंतस्कंधवलाप्रणीः । कप्लरूपधरोधीरो दिव्यवस्तानुलेपनः ॥८५॥ मल्लरूपो महाकालः कामरूपी बलान्वितः । कंसत्रासकरो भीमो मुष्टिकांतश्च कंसहा ॥८६॥ के कन्धे पर हाथ रखने वाले, गोपियों के चुम्बन के प्रेमी, गोपियों से मुख धुलाने वाले, गोपियों से पंखा झलाने वाले, गोपियों के केश को संवारने वाले, गोपियों से पुष्पशय्या बिछवाने वाले, गोपियों के हृदय के अवलम्ब, गोपियों का वाहन बनने वाले, गोपियों का मद चूर्ण करने वाले, गोपियों के दोष मार्जन करने वाले, गोपियों से अपने को छिपा लेने वाले, गोपियों की संस्मृति के प्रिय, गोपियों से वन्दित चरण वाले, गोपियों के वशवर्ती, राधा से पराजित, श्रीमान्, निकुंजों में विहार करने वाले, कुंजप्रिय, कुंजवासी, वृन्दावन का विकास करने वाले ।।७१-७५।। यमुना के जल से अंगों को सिक्त करने वाले, यमुना के सौख्यदायक, चन्द्रमा को स्तंभित करने वाले, शूर, कामी, कामविमोहन, काम के आद्य, कामनाथ, काम के मानस का भेदन करने वाले, कामद, कामरूप, कामिनियों के कामसंचय करने वाले, नित्य क्रीड़ा करने वाले, महालीला करने वाले, सर्व, सर्वगत, परमात्मा, पराधीश, अखिल कारणों के कारण, नारद के वचन को स्वीकार करने वाले, अक्रूर का परामर्श मानने वाले, अक्रूर से वन्दित चरण वाले, गोपिकाओं को संतुष्ट करने वाले, अक्रूर के वाक्यों का संग्रह करने वाले, मथुरा में वास करने वाले, अक्रूर के ताप मिटाने वाले, रजक की आयु समाप्त करने वाले, ।।७६-८०।। मथुरा को आनन्दित करने वाले, कंस के वस्त्रों को लूटने वाले, कंस के वस्त्रों को पहनने वाले, गोपों को वस्त्र देने वाले, सुदामा के घर पर जाने वाले, सुदामा से अच्छी तरह पूजित होने वाले, तंतुवायक (दर्जी) से प्रसन्न होने वाले, कुब्जा से चंदन का लेप कराने वाले, कुब्जा को रूप देने वाले, विज्ञ, मुकुंद, विस्तृत सुयश एवं कानो वाले, सर्वज्ञ, मथुरा को आलोकित करने वाले, अखिल लोकों के प्रिय, कृपा-कटाक्ष से देखने वाले, दैत्यों के शत्रु, देवपालक, अखिल दुःखों के नाशक, धनुष को तोड़ने वाले, महान् उत्सव करने वाले, कुवलयापीड का वध करने वाले, उसके दांतों को कंधे पर धारण करने वाले, लोगों की भावना के अनुसार रूप धारण करने वाले, वीर, दिव्य वस्त्र एवम् लेप से युक्त ।।८१-८५।। मल्लरूप, महाकाल, कामरूपी, बली, कंस का त्रास बढ़ाने वाले, भयंकर,