सामग्री पर जाएँ
भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

पृष्ठ 838, कुल 1008 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 838

एकोननवतितमोऽध्यायः ६१६ नित्यपूजासु तच्छक्तीस्तत्तत्स मानाःस्मरेन्मुने। प्रयोगेषु [स्मरेद्देवीं सिंहस्थां व्याघ्रगामपि ॥२५४॥ गजारूढां हयारूढां तार्क्ष्यारूढां च शक्तिभिः । श्यामामप्यरुणां पीतामसितांभोजविग्रहाम् ॥२५५॥ तत्तत्प्रयोगेषु तथा ध्यायेत्तत्तदवाप्तये । अरूणां पंचमीं वश्ये पीतां स्तंभनके स्मरेत् ॥२५६॥ श्यामां च दुर्गे मार्गे सितां युद्धेऽरिनष्टये । धूम्रामुच्चाटने ध्यायेत्साधको द्विजसत्तमः ॥२५७॥ एताः षोडश नित्यास्ते संक्षेपात्समुदीरिताः । भजतामिष्टदाः सद्यः सर्वपापक्षयंकराः ॥२५८॥ इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे बहुदुपाख्याने तृतीयपादे राधादिमन्त्रनिरूपणं नामाष्टाशीतितमोऽध्यायः ॥८८॥ एकोननवतितमोऽध्यायः सनत्कुमार उवाच अथा सामावृत्तिस्थानां शक्तीनां समयेन च । नाम्नां सहस्रं वक्ष्यामि गुरुध्यानपुरःसरम् ॥१॥ नाथा नव प्रकाशाद्याः सुभगांताः प्रकीर्तिताः । भूम्यादीनि शिवांतानि विद्धि तत्त्वानि नारद ॥२॥ गुरुजन्मादिपर्वाणि दर्शान्तानि च सप्त वै । एतानि प्राङ्मनोवृत्त्या चिंतयेत्साधकोत्तमः ॥३॥ देवी का ध्यान करे । मुने ! नित्याओं की पूजा में तत्सदृश शक्तियों की भी अर्चना करे । प्रयोगकाल में सिंह, बाघ, हाथी, अश्व तथा गरुड़ पर शक्तियों के साथ बैठी हुई देवी का ध्यान करना चाहिये । तदनन्तर श्याम, रक्त पीत तथा श्वेत कमल के समान शरीर वाली देवी का ध्यान करे । पश्चात् वस्तुओं की प्राप्ति के लिये तत्तत् प्रयोगों में उक्त प्रकार का ध्यान करना चाहिए । द्विजवर ! साधक वशीकरण में रक्तवर्ण वाली, स्तंभन में पीतवर्ण वाली दुर्गम मार्ग में श्यामवर्ण वाली, युद्ध में शत्रुनाश के लिये शुक्ल वर्ण वाली और उच्चाटन में धूम्रवर्ण वाली देवी का ध्यान करे । इस तरह मैंने सोलह नित्याओं का, जो भक्तों को सद्यः अभीष्ट फल देने वाली, तथा समस्त पापों का क्षय करने वाल हैं, संक्षिप्त वर्णन कर दिया ॥२५१-२५८॥ श्रीनारदीयपुराण के पूर्वार्ध में बृहदुपाख्यानयुक्त तृतीयपाद में राधादिमंत्र निरूपण नामक अठ्ठासीवां अध्याय समाप्त ॥८८॥ अध्याय ८९ कवच सहित ललिता सहस्रनामस्तोत्र सनत्कुमार बोले--इसके उपरान्त गुरु का ध्यान करके मैं सामवेद के अनुसार शक्तियों के सहस्र नामों को यथार्थतः प्रतिपादन करूंगा । नारद ! प्रकाशा से लेकर सुभगा तक नौ देवियां स्वामिनी कहलाती हैं । भूमि से लेकर शिवा तक तत्त्वों को समझिये । गुरुजन्म से लेकर दर्श तक सात पर्व हैं । उत्तम साधक पहले