बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 864, कुल 1008 में से
संदर्भ में पढ़ेंनवतितमोऽध्यायः ८४५ एवं क्रमेण सर्वासां या या संख्या जपस्य सा । कार्या सिद्ध्यै तु विद्यायास्ततः कुर्यात्प्रयोगकान् ॥२२२॥ द्विगुणो हि जपः कार्यः कामेश्वर्या मुनीश्वर । सिद्धे मंत्रे प्रयोगांस्तु विदधीत यथा तथा ॥२२३॥ जपो लक्षं समाख्यातो होमादिस्तद्दशांशतः । कर्तव्यो भगमालाया विद्यासिद्धयै मुनीश्वर ॥२२४॥ नित्यक्लिन्नाजपः प्रोक्तो लक्षं होमो दशांशतः । कार्यः सिद्ध्यै तु विद्यायाः प्रयोगात्साधयेत्ततः ॥२२५॥ ततो मौनी पयोभक्ष प्रजपेन्नवलक्षकम् । भेरुंडामन्त्रबुभ्रुतं तु शेषं कुर्यात्प्रयत्नतः ॥२२६॥ लक्षत्रयं जपो वह्निवासिन्याः समुदीरितः । अन्यत्सर्वं पुरा यच्च कार्यं साधकसत्तमैः ॥२२७॥ महावज्रेश्वरीविद्याजपो लक्षत्रयो मतः । हवनादि दशांशेन कार्यं प्रोक्तक्रमेण हि ॥२२८॥ अतंद्रितो जपेल्लक्षमितं दूतीमनुं मुने । तद्दशांशक्रमेणैव होमादिः प्रोक्तमार्गतः ॥२२९॥ त्वरितां प्रजपेल्लक्षप्रमितां तद्दशांशतः । कृत्वा होमादिकं सर्वं विद्यासिद्धयै मुनीश्वर ॥२३०॥ जपो लक्षं समाख्यातो होमादिस्तद्दशांशतः । विद्यायाः कुलसुन्दर्याः कर्तव्यो द्विजसत्तम ॥२३१॥ नित्यानित्याजपो विप्र त्रिलक्षप्रमितो मतः । होमादिस्तद्दशांशेन प्रोक्तः प्रोक्तविधानतः ॥२३२॥ त्रिपञ्चाशल्लक्षमुक्तो नियमेन मुनीश्वर । जपो नित्यपताकाया होमादिस्तद्दशांशतः ॥२३३॥ विजयाया जपः प्रोक्तो लक्षमानेन नारद । अन्यत्पूर्ववदाख्यातं विद्यासिद्धयै तु साधनम् ॥२३४॥ बत्तलक्षप्रमाणे सर्वमंगळिकां जपेत् । तद्दशांशक्रमेणैव होमादि समुदीरितम् ॥२३५॥ अष्टलक्षं हविष्याशी ज्वालामालिनिकां जपेत् । होमादिस्तद्दशांशेन प्रोक्तद्रव्यैः समीरितः ॥२३६॥ चित्राया भूपलक्षं तु जपो होमादिकस्ततः । प्रोक्तेन विधिना कार्यों विद्यासिद्धयै मुनीश्वर ॥२३७॥ चाहिये ॥२१६-२२१॥ इस प्रकार के प्रयोग करने से पहले मन्त्र सिद्ध कर लेना आवश्यक है। मुनीश्वर ! कामे- श्वरी के मन्त्र का जप द्विगुण करना चाहिये । मंत्र सिद्ध हो जाने पर किसी भी प्रकार उसका प्रयोग किया जा सकता है । भगमाला के मन्त्र सिद्ध करने के लिये मंत्र का जप एक लाख बतलाया गया है । हवन आदि तो उसके दशांश क्रम से करना चाहिये । नित्यक्लिन्ना का भो जप एक लाख और हवन आदि दशांश करना चाहिये । मन्त्र सिद्धि के बाद हो साधक प्रयोग करे । तदनन्तर मौन एवम् दुग्धभक्षी होते हुए भेरुंडा के मन्त्र का नौ लाख जप करे। वह्निवासिनी के मन्त्र का तीन लाख जप करना चाहिये । उत्तम साधक अन्य सब कार्य पूर्ववत् करे । माहेश्वरी का मन्त्र जप भी तीन लाख करे । हवन आदि तो दशांश क्रम से ही होंगे । मुने ! निरालस्य होकर दूती के मन्त्र का एक लाख जप और उसके दशांश क्रम से हवन आदि करे ॥२२२- २२९॥ मुनीश्वर ! स्वरिता के मन्त्र का एक लाख जप करके मन्त्र-सिद्धि के लिये दशांश क्रम से होम आदि करना चाहिये । द्विजश्रेष्ठ ! कुलसुन्दरी का भो एक लाख मन्त्र जप और दशांश हवन आदि करना चाहिये । विप्र ! नित्या-अनित्या का मन्त्र जप तीन लाख और होमादि दशांश क्रम से बतलाया गया है। मुनीश्वर ! नित्यपताका का मन्त्र जप तिरपन लाख और हवन आदि दशांश कहा गया है । नारद ! विजया का मन्त्र जप एक लाख और हवन आदि दशांश क्रम से करना चाहिये । सर्वमंगळिका का मन्त्र जप बत्तीस लाख और होमादि दशांश क्रम से कहा गया है । हविष्य भोजन पूर्वक ज्वालामालिनिका का मन्त्र जप आठ लाख और