बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें८६८ नारदीयपुराणम् स याति वैष्णवं धाम सर्वदेवनमस्कृतः । पद्मानुक्रमणीमेतां यः पठेच्छृणुयात्तथा ॥३९॥ सोऽपि पद्मपुराणस्य लभेच्छ्रवणजं फलम् ॥४०॥ इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे बृहदुपाख्याने चतुर्थपादे पद्मपुराणानुक्रमणिकावर्णनं नाम त्रिनवतितमोऽध्यायः ॥९३॥ चतुर्नवतितमोऽध्यायः श्रीब्रह्मोवाच शृणु वत्स प्रवक्ष्यामि पुराणं वैष्णवं महत् । त्रयोविंशतिसाहस्रं सर्वपातकनाशनम् ॥१॥ यत्रादिभागे निर्दिष्टाः षडंशा शक्तिजेन ह । मैत्रेयायादिमे तत्र पुराणस्यावतारिकाम् ॥२॥ आदिकारणसर्गश्च देवादीनां च संभवः । समुद्रमथनाख्यानं दक्षादीनां ततोऽन्वयः ॥३॥ ध्रुवस्य चरितं चैव पृथोश्चरितमेव च । प्राचेतसं तथाख्यानं प्रह्लादस्य कथानकम् ॥४॥ विष्णुलोक को जाता है। जो मानव पद्मपुराण की इस अनुक्रमणी को सुनेगा या पढ़ेगा, वह भी इस पुराण के श्रवणजन्य फल को प्राप्त करेगा ॥३६-४०॥ श्रीनारदीयपुराण के पूर्वार्ध में बृहदुपाख्यानयुक्त चतुर्थपाद में पद्मपुराण का अनुक्रमणिका वर्णन नामक तिरानवेवां अध्याय समाप्त ॥६३॥ अध्याय ९४ विष्णुपुराण की विषय-सूची श्री ब्रह्मा बोले- वत्स ! सुनो, अब मैं अखिल पातकों के नाश करने वाले तथा तेईस हजार श्लोक वाले विष्णु महापुराण के सम्बन्ध में कहूँगा, जिसके आदि भाग में पराशर ने छह अंशों का निर्देश किया है। उसके प्रारंभ में मुनि ने मैत्रेय से पुराण की अवतारिका बतलाई है। तदनन्तर सृष्टि का आदिकारण, देवादिकों की उत्पत्ति, समुद्रमंथन का आख्यान, दक्ष आदि का वंशवर्णन, ध्रुव का चरित्र, प्रचेता का आख्यान, प्रह्लाद का कथानक, राज्यों का पृथक्-पृथक् अधिकार वर्णन-ये सब बातें प्रथम अंश में कही गई हैं ॥१-४१/२॥ द्वितीय अंश