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भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

पृष्ठ 893, कुल 1008 में से

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पृष्ठ 893

८७४ नारदीयपुराणम् प्रोष्ठपद्यां पूर्णिमायां हेमसिंहसमन्वितम्। देयं भागवताख्यं द्विजाय प्रीतिपूर्वकम् ॥२३॥ संपूज्य वस्त्रहेमाद्यैर्भगवद्भक्तिमिच्छता । योऽप्यनुक्रमणीमेतां श्रावयेच्छृणुयात्तथा ॥ स पुराणश्रवणजं प्राप्नोति फलमुत्तमम् ॥२४॥ इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे बृहदुपाख्याने चतुर्थपादे श्रीमद्भागवतानुक्रमणी- निरूपणं नाम षण्णवतितमोऽध्यायः ॥९६॥ * सप्तनवतितमोऽध्यायः श्रीब्रह्मोवाच शृणु विप्र प्रवक्ष्यामि पुराणं नारदीयकम्। पञ्चविंशतिसाहस्रं बृहत्कल्पकथाश्रयम् ॥१॥ सूतशौनकसंवादः सृष्टिसंक्षेपवर्णनम् । नानाधर्मकथाः पुण्याः प्रवृत्ते समुदाहृताः ॥२॥ प्राग्भागे प्रथमे पादे सनकेन महात्मना । द्वितीये मोक्षधर्माख्ये मोक्षोपायनिरूपणम् ॥३॥ वेदांगानां च कथनं शुकोत्पत्तिश्च विस्तरात् । सनंदनेन गदिता नारदाय महात्मने ॥४॥ महातंत्रे समुद्दिष्टं पशुपाशविमोक्षणम् । मंत्राणां शोधनं दीक्षामंत्रोद्धारश्च पूजनम् ॥५॥ प्रयोगाः कवचं नामसहस्रं स्तोत्रमेव च । गणेशसूर्यविष्णूनां शिवशक्त्योरनुक्रमात् ॥६॥ में वस्त्र, सुवर्ण आदि से प्रीतिपूर्वक भगवद्भक्त ब्राह्मण की पूजा कर स्वर्णसिंह समेत भागवतपुराण समर्पित करे। जो व्यक्ति इस अनुक्रमणिका को सुनेगा या सुनावेगा, उसे भी पुराण सुनने का उत्तम फल मिलेगा ॥२३-२४॥ श्री नारदीयपुराण के पूर्वार्द्ध में बृहदुपाख्यानयुक्त चतुर्थपाद में श्रीमद्भागवतानुक्रमणी निरूपण नामक छानबेवां अध्याय समाप्त ॥९६॥ अध्याय ९७ श्रीनारदीयपुराण की विषयानुक्रमणी श्रीब्रह्मा बोले-विप्र ! अब नारदीयपुराण को सुनो । उसमें पचीस हजार श्लोक हैं; वह बृहत्कल्प की कथा से युक्त है । पूर्वार्ध के प्रथम पाद में सूत और शौनक का संवाद, सृष्टि का संक्षिप्त वर्णन तथा महात्मा सनक द्वारा अनेक धर्म कथायें कही गई हैं । मोक्षधर्म नामक द्वितीय पाद में सनंदन ने महात्मा नारद से मोक्ष का उपाय, वेदांगों तथा शुक की उत्पत्ति बताई है ॥१-३½॥ तृतीय पाद में मुनि सनत्कुमार ने नारद से महातंत्रोद्दिष्ट पशुपाशविमोक्षण, मंत्रों का संशोधन, दीक्षा, मंत्रोद्धार, पूजन, प्रयोग, कवच, सहस्रनाम, गणेश, सूर्य, विष्णु, शिव