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भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

पृष्ठ 907, कुल 1008 में से

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पृष्ठ 907

६८६ नारदीयपुराणम् यत्र वेंकटकुञ्चस्य माहात्म्यं पापनाशनम् । कमलायाः कथा पुण्या श्रीनिवासस्थितिस्ततः ॥२१॥ कुलालाख्यानकं चात्र सुवर्णमुखरी कथा । नानाख्यानसमायुक्ता भारद्वाजकथाऽद्भुता ॥२२॥ मतंगांजनसंवादः कीर्तितः पापनाशनः । पुरुषोत्तममाहात्म्यं कीर्तितं चोत्कले ततः ॥२४॥ मार्कंडेयसमाख्यानमंबरीषस्य भूपतेः । इंद्रद्युम्नस्य चाख्यानं विद्यापतिकथा शुभा ॥२४॥ जैमिनेः समुपाख्यानं नारदस्यापि वाडव । नीलकंठसमाख्यानं नरसिंहोपवर्णनम् ॥२५॥ अश्वमेधकथा राज्ञो ब्रह्मलोकगतिस्तथा । रथयात्राविधिः पश्चाज्जन्मस्थानविधिस्तथा ॥२६॥ दक्षिणामूर्युपाख्यानं गुंडिवाख्यानकं ततः । रथरक्षाविधानं च शयनोत्सवकीर्तनम् ॥२७॥ श्वेतोपाख्यानमत्रोक्तं पृथूत्सर्वनिरूपणम् । दोलोत्सवो भगवतो व्रतं सांवत्सराभिधम् ॥२८॥ पूजा चाकामिका विष्णोरुद्दालकनियोगतः । योगसाधनमत्रोक्तं नानाभोगनिरूपणम् ॥२९॥ दशावतारकथनं स्नानादिपरिकीर्तनम् । ततो बदरिकायाश्च माहात्म्यं पापनाशनम् ॥३०॥ अग्न्यादितीर्थमाहात्म्यं वैनतेयशिलाप्लवम् । कारणं भगवद्वासे तीर्थं कपालमोचनम् ॥३१॥ पंचधाराभिधं तीर्थं मेरुसंस्थापनं तथा । ततः कात्तिकमाहात्म्ये माहात्म्यं मदनालसम् ॥३२॥ धूम्रकेशसमाख्यानं दिनकृत्यानि कार्तिके । पंचभीष्मव्रताख्यानं कीर्तितं भुक्तिमुक्तिदम् ॥३३॥ ततो मार्गस्य माहात्म्ये विधानं स्नानजं तथा । पुंड्रादिकीर्तनं चात्र मालाधारणपुण्यकम् ॥३४॥ पंचामृतस्नानपुण्यं घंटानादादिजं फलम् । नानापुष्पार्चनफलं तुलसीदलजं फलम् ॥३५॥ नैवेद्यस्य च माहात्म्यं हरिवासरकीर्तनम् । अखंडैकादशीपुण्यं तथा जागरणस्य च ॥३६॥ यस्योत्सवविधानं च नाममाहात्म्यकीर्तनम् । ध्यानादिपुण्यकथनं माहात्म्यं मथुरामवम् ॥३७॥ मथुरातीर्थमाहात्म्यं पृथगुक्तं ततः परम् । वनानां द्वादशानां च माहात्म्यं कीर्तितं ततः ॥३८॥

आख्यानों से युक्त भारद्वाज की अद्भुत कथा, मतंग और अंजन का पापनाशी संवाद, उत्कलवर्ती पुरुषोत्तम का माहात्म्य, मार्कंडेय राजा अंबरीष तथा इंद्रद्युम्न की कथा, विद्यापति की कथा, जैमिनि तथा नारद का आख्यान, नीलकण्ठ समाख्यान, नरसिंहोपवर्णन ॥२०-२५॥ अश्वमेध कथा, राजा की ब्रह्मलोकगति, रथयात्रा- विधि, जन्मस्थान विधि, दक्षिणामूति का उपाख्यान, गुंडिवाख्यान, रथरक्षाविधान, शयनोत्सवकीर्तन, श्वेतो- पाख्यान, पृथूत्सव निरूपण, भगवान् का दोलोत्सव, संवत्सर नामक व्रत, उद्दालक के नियोग से विष्णु की निष्काम पूजा, योग साधन, अनेक भोगों का निरूपण, दशावतार कथन, स्नान आदि का कथन, पापनाशी बदरिकाश्रम का माहात्म्य, अग्नि आदि तीर्थों का माहात्म्य, गरुड शिला का माहात्म्य, भगवद्वास का कारण, कपालमोचन नामक तीर्थ, पंचधारा नामक तीर्थ, मेरु संस्थापन नामक तीर्थ, कार्तिक माहात्म्य में मदना- लस माहात्म्य ॥२६-३२॥ धूम्रकेशसमाख्यान, कार्तिकदिन-कृत्य, मुक्ति-मुक्तिदायक पंचभीष्मव्रताख्यान, अगहन माहात्म्य में स्नान का विधान, पुंड्रादिकीर्तन, मालधारण का पुण्य, पंचामृतस्नान पुण्य, घंटानाव आदि का फल, अनेकपुष्पार्चन-फल, तुलसी दल का फल, नैवेद्य का महात्म्य, हरिवासर कीर्तन, अखंड एकादशी का पुण्य, जागरण का पुण्य, उत्सव विधान, नाममाहात्म्यकीर्तन, ध्यान आदि का पुण्यकथन, मथुरा का माहात्म्य, मथुरातीर्थ माहात्म्य, द्वादश वनों का माहात्म्य ॥३३-३८॥ श्रीमद्भागवत का माहात्म्य, वज्र और