बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)
Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६०० नारदीयपुराणम् विप्राय वेदविदुषे घृतधेनुसमन्वितम् । स समुद्धृत्य नरकान्नयेत्स्वर्गं पितृन्स्वकान् ॥२१॥ देहान्ते भुक्तभोगोऽसौ याति विष्णोः परं पदम् । ॥२२॥ इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे बृहदुपाख्याने चतुर्थपादे वामनपुराणानुक्रमणीवर्णनं नाम पञ्चाधिकशततमोऽध्यायः ॥१०५॥ षडधिकशततमोऽध्यायः ब्रह्मोवाच शृणु वत्स मरीचे त्वं पुराणं कूर्मसंज्ञकम् । लक्ष्मीकल्पानुचरितं यत्र कूर्मवपुर्हरिः ॥१॥ धर्मार्थकाममोक्षाणां माहात्म्यं च पृथक्पृथक् । इंद्रद्युम्नप्रसंगेन प्राहर्षिभ्यो दयान्वितः ॥२॥ तत्सप्तदशसाहस्रं सुचतुः संहितं शुभम् । यत्र ब्राह्माः पुरा प्रोक्ता धर्मा नानाविधा मुने ॥३॥ नाना कथाप्रसंगेन नृणां सद्गतिदायकाः । तत्र पूर्वविभागे तु पुराणोपक्रमः पुरा ॥४॥ लक्ष्मींद्रद्युम्नसंवादः कूर्मर्षिगणसंकथा । वर्णाश्रमाचारकथा जगदुत्पत्तिकीर्तनम् ॥५॥ कालसंख्या समासेन लयान्ते स्तवनं विष्णोः । ततः संक्षेपतः सर्गः शांकरं चरितं तथा ॥६॥ सहस्रनाम पार्वत्या योगस्य च निरूपणम् । भृगुवंशसमाख्यानं ततः स्वायम्भुवस्य च ॥७॥ देवादीनां समुत्पत्तिर्दक्षयज्ञाहूतिस्ततः । दक्षसृष्टिकथा पश्चात्कश्यपान्वयकीर्तनम् ॥८॥ आत्रेयवंशकथनं कृष्णस्य चरितं शुभम् । मातंडकणसंवादो व्यासपाण्डवसंकथा ॥६॥ वेदवेत्ता द्विज को घृतधेनु सहित समर्पित करता है, वह अपने पितरों को नरक से उद्धार करके स्वर्ग को पहुँचाता हैं और स्वयं सुखोपभोग करते हुए देहान्त में वैकुण्ठ को जाता है ।।१५-२०।। श्री नारदीयपुराण के पूर्वार्ध में बृहदुपाख्यानयुक्त चतुर्थपाद में वामनपुराणानुक्रमणी वर्णन नामक एक सौ पाँचवां अध्याय समाप्त ॥१०५॥ अध्याय १०६ कूर्मपुराण की विषयानुक्रमणी ब्रह्मा बोले--हे वत्स ! मरीचे ! लक्ष्मीकल्पानुचरित कूर्म नामक पुराण सुनो, जिसमें हरि के कूर्मावतार और धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, के माहात्म्य का पृथक्-पृथक् रूप से वर्णन किया गया है । यह पुराण इंद्रद्युम्न के प्रसंग में दयालु व्यास द्वारा ऋषियों को बतलाया गया है । इसमें चार संहितायें तथा सत्रह हजार श्लोक हैं। मुने ! इसके पूर्व भाग में विविध कथा प्रसंग से मनुष्यों को सद्गति देने वाले अनेक ब्राह्मण धर्मों का प्रतिपादन, पुराणोपक्रम, लक्ष्मी और इंदुद्युम्न का संवाद, कूर्म और ऋषियों का संवाद, वर्णाश्रमाचारकथा, जगदुत्पत्तिकी- र्तन, संक्षेप से कालसंख्या, लयान्त में भगवान् की स्तुति, संक्षेप से सृष्टि वर्णन, शंकरचरित्र, पार्वतीसहस्रनाम,