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भारतकोश
बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

बृहन्नारदीय पुराण (संस्कृत मूल व हिन्दी व्याख्या)

Brihan Naradiya Purana with Sanskrit & Hindi Commentary

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,008 पृष्ठ

पृष्ठ 967, कुल 1008 में से

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पृष्ठ 967

९४८ नारदीयपुराणम् महानंदेति सा प्रोक्ता सदानंदकरी नृणाम् । तस्यां स्नानं तथा दानं जपो होम उपोषणम् ॥३०॥ सर्वमक्षयतां याति नात्र कार्या विचारणा । फाल्गुनामलपक्षस्य नवमी या द्विजोत्तम ॥३१॥ आनंदा सा महापुण्या सर्वपापहरा स्मृता । सोपवासोऽर्चयेत्तत्र यस्त्वांनंदां द्विजोत्तम ॥३२॥ स लभेद्वांछितान्कामान्सत्यं सत्यं मयोदितम् ॥३३॥ इति श्रीबृहन्नारदीयपुराणे पूर्वभागे बृहदुपाख्याने चतुर्थपादे द्वादशमासस्थितनवमीव्रतकथनं नामाष्टादशाधिकशततमोऽध्यायः ॥११८॥ एकोनविंशत्यधिकशततमोऽध्यायः सनातन उवाच अथ तेऽहं प्रवक्ष्यामि दशम्यां वै व्रतानि च । यानि कृत्वा नरो भक्त्या धर्मराजप्रियो भवेत् ॥१॥ चैत्रशुक्लदशम्यां तु धर्मराजं प्रपूजयेत् । तत्कालसंभवैः पुष्पैः फलैर्गन्धादिभिस्तथा ॥२॥ सोपवासो वैकभक्तो भोजयित्वा द्विजोत्तमान् । चतुर्दश ततस्तेभ्यः शक्त्या दद्याच्च दक्षिणाम् ॥३॥ एवं यः कुरुते विप्र धर्मराजप्रपूजनम् । स धर्मस्याज्ञयागच्छेद् देवैः साधर्म्यमच्युतः ॥४॥ है, उसका नाम महानंदा है। वह मनुष्यों को सदा आनन्द देती है। उस दिन स्नान, दान, जप, होम, उपवास आदि जो कुछ किये जाते हैं, वे अक्षय होते हैं, इसमें विचार करने की आवश्यकता नहीं। द्विजवर्य ! फाल्गुन- शुक्लपक्ष की जो नवमी है, उसका नाम आनंदा है। वह महापुण्यदायिनी तथा अखिलपापहारिणी है। उस दिन जो उपवास करते हुए नंदा देवी की अर्चना करता है, उसका अभीष्ट सिद्ध होतो है, यह मैं सत्य कहता हूँ ॥२८-३३॥ श्रीनारदीय पुराण के पूर्वार्ध में बृहदुपाख्यानयुक्त चतुर्थपाद में द्वादशमासस्थित नवमी व्रत कथन नामक एक सो अठारहवाँ अध्याय समाप्त ॥११८॥ अध्याय ११९ बारह मासों का दशमी व्रत सनातन बोले--अब मैं तुम्हें दशमी के व्रतों को बतलाऊँगा, जिनके भक्तिपूर्वक अनुष्ठान से मनुष्य धर्मराज का प्रिय होता है। चैत्र-शुक्ल-दशमी में उपवास या एक भक्त करते हुए सामयिक पुष्प, फल एवम् सुगंधित द्रव्यों से धर्मराज की पूजा कर चौदह उत्तम ब्राह्मणों को खिलाकर यथाशक्ति दक्षिणा देनी चाहिये ॥१-३॥ विप्र ! जो इस प्रकार धर्मराज का पूजन करता है, वह उनकी आज्ञा से देवलोक को जाता है। वैशाख-शुक्ल-

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