बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकारकांशफलमाह १२७ उक्तस्थानस्थिते राहौ लोहयन्त्रादिकारकः। रविणा खड्गधारी च कुजेन कुन्तधारकः॥१९७॥ राहु हो तो लोह के यंत्रों को बनाने वाला, रवि हो तो खड्ग धारण करने वाला और भौम हो तो कुंत (भाला) धारण करने वाला होता है॥१९७॥ चन्द्रेज्यौ कारकांशे च तथां तत्पञ्चमे स्थितौ। ग्रन्थकर्त्ता भवेन्नूनं सर्वविद्याविशारदः॥१९८॥ चन्द्रमा और गुरु कारकांश में हो अथवा उससे पाँचवें भाव में हो तो बालक सभी विद्याओं को जानने वाला और ग्रंथकार होता है॥१९८॥ उक्तस्थानंगते शुक्रे स्वल्पग्रन्थकरो द्विज। उक्तस्थानगते सौम्ये किञ्चिद्ग्रन्थकरो ह्यसौ॥१९९॥ यदि उक्त स्थान में शुक्र हो तो अल्प ग्रंथकार होता है। यदि बुध हो तो कुछ ग्रंथकार होता है॥१९९॥ शुक्रेण काव्यकर्ता च प्राकृतग्रन्थतत्परः। गुरुणा सर्वग्रन्थानां कारको द्विजसत्तम॥२००॥ शुक्र हो तो काव्य करने वाला, गुरु हो तो सभी ग्रंथों को करने वाला होता है॥२००॥ उक्तस्थानगतः शौरिः सभाजाड्यो भवेन्नरः। मीमांसको भवेन्नूनमुक्तस्थानगते बुधः॥२०१॥ यदि शनि हो तो सभामूक होता है। उक्त स्थान में बुध हो तो मीमांसक होता है॥२०१॥ कारकांशे धरासूनुर्लग्ने वा नवपञ्चमे। नैयायिको भवेन्नूनं सुष्ठुकाव्यकरो नरः॥२०२॥ कारकांश लग्न में वा नवम-पंचम में हो तो नैयायिक और कविता करने वाला होता है॥२०२॥ कारकांशे निशानाथे त्रिकोणे चाथ लग्नगे। सांख्यशास्त्रज्ञनिपुणो जायते मतिमान्नरः॥२०३॥ कारकांश में वा त्रिकोण वा लग्न में यदि चन्द्रमा हो तो सांख्यशास्त्र को जानने वाला होता है॥२०३॥