बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकारकमारकविचाराध्यायः १४५ गुरु, शुक्र, चन्द्रमा ये पापफलदायक मारकेश के फल को देने वाले होते हैं और बुध अल्प शुभफल को देने वाला होता है। ऐसा लक्षण वृषलग्न वालों का होता है॥१७॥ मिथुनलग्नम्— भौमजीवारुणः पापा एक एव कविः शुभः। शनैश्चरेण जीवस्य योगो मेषभवो यथा॥१८॥ मिथुन लग्नवाले को भौम, गुरु, सूर्य पापफल देने वाले, केवल एक मात्र शुक्र शुभफल देने वाला होता है। शनि-गुरु का योग मेषलग्न वाले के समान ही फलदायक होता है॥१८॥ नायं शशी निहन्ता स्याल्लक्षणं पापनिष्फलम्। ज्ञातव्यानि द्वन्द्वजस्य फलान्येतानि सूरिभिः॥१९॥ चन्द्रमा मारक नहीं होता है किन्तु साहचर्यानुसार फल देने वाला होता है। इस प्रकार मिथुन लग्न वालों के फल का विचार करना चाहिए॥१९॥ कर्कलग्नम्— भार्गवेन्दुसुतौ पापौ भौमेज्यशशिनः शुभाः। एकग्रहस्तु भवेत्साक्षान्महीसुतो योगकारकः॥२०॥ कर्क लग्नवाले को शुक्र-बुध पाप फल देने वाले और भौम, गुरु, चन्द्रमा शुभ फल देने वाले होते हैं। केवल एक भौम ही राजयोगकारक होता है॥२०॥ निहन्ता रविजोऽन्ये च साहचर्यात्फलप्रदाः। कुलीरसम्भवस्यैव फलान्युक्तानि सूरिभिः॥२१॥ शनि मारकेश होता है, अन्य ग्रह साहचर्य के अनुसार फल देते हैं। ऐसा कर्क लग्न वाले का फल होता है॥२१॥ अथ सिंहलग्नम्— बुधशुक्रार्कजाः पापाः भौमेज्यार्काः शुभप्रदाः। प्रभवेद्योगमात्रेण न शुभं गुरुशुक्रयोः॥२२॥ सिंह लग्नवाले को बुध, शुक्र, शनि पापफल देने वाले और भौम, गुरु, सूर्य शुभ फल देने वाले होते हैं। गुरु-शुक्र के योगमात्र से शुभफल नहीं होता है॥२२॥