भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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१४६ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् घ्नन्ति सौम्यादयः पापा मारकत्वेन लक्षिताः। एवं फलानि वेद्यानि सिंहे यस्य जनुर्भवेत् ॥२३॥ बुध पापग्रहों के साहचर्य से मारकेश होता है। ऐसा सिंहलग्न वालों का फल होता है।।२३।। अथ कन्यालग्नम्- कुजजीवेन्दवः पापा एक एव भृगुः शुभः। भार्गवेन्दुसुतावेव भवेतां योगकारको ॥२४॥ कन्या लग्नवाले को भौम, गुरु, चन्द्रमा पापफल देने वाले, केवल शुक्र ही शुभफलदायक है। शुक्र-बुध योगकारक होते हैं।।२४।। निहन्ता कविरन्ये तु मारकास्तु कुजादयः। प्रतीक्षते फलान्युक्तान्येवं कन्याभवे बुधैः ॥२५॥ मारकेश शुक्र ही होता है, अन्य भौम आदि मारकेश के साहचर्य से फल देते हैं। यह कन्यालग्न का फल है।।२५।। अथ तुलालग्नम्- जीवार्कमहीजाः पापाः शनैश्चरबुधौ शुभौ। भवेतां राजयोगस्य कारकौ चन्द्रतत्सुतौ ॥२६॥ तुलालग्न वाले को गुरु, सूर्य, भौम पापफल देनेवाले, शनि-बुध शुभफलदाता, चंद्रमा-बुध राजयोगकारक होते हैं।।२६।। कुजो निहन्ति जीवाद्याः परे मारकलक्षणाः। निहन्तारः फलान्येवं काव्यो न तु तुलाभवः ॥२७॥ भौम मारकेश होता है, गुरु आदि अन्य ग्रह, जो मारकेश के लक्षण के हैं, वे अनिष्टकारक और शुक्र समफलदाता होता है; ऐसा तुलालग्न का फल जानना चाहिए।।२७।। अथ वृश्चिकलग्नम्- सौम्यभौमसिताः पापाः शुभौ गुरुनिशाकरौ। सूर्यचन्द्रमसावेव भवेतां योगकारको ॥२८॥ वृश्चिक लग्नवाले को बुध, भौम, शुक्र पाप फल देने वाले, गुरु-चंद्रमा शुभ फल देने वाले और सूर्य-चंद्रमा योगकारक होते हैं।।२८।। जीवो निहन्ता सौम्याद्या हन्तारो मारकाह्वयाः। तत्तत्फलानि विज्ञान्येवं वृश्चिकजन्मनः ॥२९॥