भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 145, कुल 800 में से

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कारकमारकविचाराध्यायः १४७ गुरु मारकेश होता है, बुध आदि मारक के समान ही फलदाता होते हैं। ऐसा वृश्चिक लग्न वाले का फल होता है।।२९।। अथ धनुर्लग्नम्- एक एव कविः पापः शुभौ सौम्यदिवाकरौ। योगो भास्करसौम्याभ्यां निहन्ता भास्करःसुतः।।३०।। धनुलग्नवाले को शुक्र पाप फल देने वाला, बुध-सूर्य शुभफल देने वाले, सूर्य-बुध का योग राजयोगकारक होता है।।३०।। घ्नन्ति शुक्रादयः पापा मारकत्वेन लक्षिताः। ज्ञातव्यानि फलान्येवं चापजस्य मनीषिभिः।।३१।। शनि मारकेश होता है, शुक्र आदि मारकेश के समान ही पापफल देने वाले होते हैं; ऐसा धन लग्न का फल होतां है।।३१।। अथ मकरलग्नम्- कुजजीवेन्दवः पापाः शुभौ भार्गवचन्द्रजौ। स्वयं चैव निहन्ता स्यान्मन्दो भौमादयः परे।।३२।। मकर लग्न वाले को भौम, गुरु, चंद्रमा पाप फल देने वाले शुक्र और चंद्रमा शुभफल देने वाले, शनि मारकेश होता है। भौम आदि मारकेश के लक्षण के समान होने से मारक होते हैं।।३२।' तल्लक्षणानि हन्तारः कविरेकः सुयोगकृत्। ज्ञातव्यानि फलान्येवं विबुधैर्मृगजन्मनः।।३३।। शुक्र योगकारक होता है। इस प्रकार का फल मकर लग्न का होता है।।३३।। अथ कुम्भलग्नम्- जीवचन्द्रकुजाः पापा एको दैत्यगुरुः शुभः। राजयोगकरः शुक्रो भौमश्चैव बृहस्पतिः।।३४।। कुंभ लग्न वाले को गुरु, चंद्रमा, भौम पापफल देने वाले और शुक्र केवल राजयोग कारक होता है।।३४।। निहन्ता सन्ति भौमाद्या मारकत्वेन लक्षिताः। एवमेव फलान्यूह्यान्येतानि घटजन्मनः।।३५।। भौम-गुरु मारकेश होते हैं, अन्य ग्रह भी मारकेश से संबंध होने से उनके फलों को देते हैं।।३५।।

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