भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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द्वादशभावविचाराध्यायः १४९ दूसरे भाव में धन, धान्य, कुटुंब, मृत्यु, शत्रु का और धातु, रत्न आदि का विचार करना चाहिए॥२॥ विक्रमं भृत्यभ्रात्रादि चोपदेशप्रयाणकम्। पित्रोर्वे मरणं विप्र दुश्चिक्याच्च निरीक्षयेत् ॥३॥ तीसरे भाव में नौकर, भाई, उपदेश, यात्रा और पिता के मरण का विचार करना चाहिए॥३॥ वाहनस्याथ बन्धूनां मातृसौख्यादिकानपि। निधिक्षेत्रं गृहं चापि पातालाच्च निरीक्षयेत् ॥४॥ चौथे भाव से वाहन (सवारी) का, बंधुओं का, मातृसुख का, निधि (गड़े धन) का, क्षेत्र (खेत) तथा गृह का विचार करना चाहिए॥४॥ यन्त्रमन्त्रौ तथा विद्या बुद्धेश्चैव प्रबन्धकम्। पुत्रराज्यापभ्रंशादि पश्येत्पुत्रालयाद् बुधः॥५॥ पाँचवें भाव से यंत्र, मंत्र, विद्या, बुद्धि, प्रबंध, पुत्र और राज्य के स्खलन का विचार करना चाहिए॥५॥ मातुलान्तकशङ्कानां शत्रूंश्चैव व्रणादिकान्। सपत्नीमातरञ्चापि शत्रुस्थानान्निरीक्षयेत्॥६॥ छठे भाव से मामा के मरण की शंका का, शत्रु और व्रण का तथा सौतेली माँ का विचार करना चाहिए॥६॥ जायामध्वप्रयाणं च व्यापारं हतवीक्षणम्। मरणं च स्वदेहस्य जायाभावान्निरीक्षयेत्॥७॥ सप्तम भाव से स्त्री, मार्ग, यात्रा, व्यापार, नष्ट वस्तु और मृत्यु का विचार करना चाहिए॥७॥ ऋणदानग्रहणयोर्गुदे चैवाङ्कुरादयः। गत्यनूकादिकं सर्वं पश्येद्रन्ध्राद्विचक्षणः॥८॥ आठवें भाव से ऋण देना-लेना, गुदा की बीमारी, पूर्वजन्म और इस जन्म का विवरण— ये सब विचार करना चाहिए॥८॥ भाग्यं धर्मं च श्यालं च भ्रातृपत्न्यादिकांस्तथा। तीर्थयात्रादिकं सर्वं धर्मस्थानान्निरीक्षयेत्॥९॥ नवम भाव से भाग्य, साला, भाई की स्त्री, तीर्थयात्रा आदि का विचार करना चाहिए॥९॥