बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् पाँचवें भाव में ३ या ४ पापग्रह हों और शुभग्रह न हो और पंचमेश नीच राशि में हो तो बालक नीच कर्म करने वाला होता है॥८९॥ पुत्रप्राप्ति-वियोगसमयश्च- पुत्रस्थानं गते जीवे तदीशे भृगुसंयुते। द्वात्रिंशे च त्रयस्त्रिंशे वत्सरे पुत्रलाभकृत् ॥९०॥ पंचम स्थान में गुरु हो और पंचमेश शुक्र से युत हो तो ३२वें वा ३३वें वर्ष में पुत्र का लाभ होता है॥९०॥ सुतेशे केन्द्रभावस्थे कारकेण समन्विते। षट्त्रिंशे त्रिंशदब्दे च पुत्रोत्पत्तिं विनिर्दिशेत् ॥९१॥ पंचमेश कारक से युत होकर केंद्र में हो तो ३६वें वर्ष में पुत्र उत्पन्न होता है॥९१॥ लग्नाद्भाग्यगते जीवे जीवाद्भाग्यगते भृगौ। लग्नेशे भृगुसंयुक्ते चत्वारिंशे सुतं लभेत् ॥९२॥ लग्न से नवम स्थान में गुरु हो और गुरु से भाग्य ९वें भाव में शुक्र हो तथा लग्नेश शुक्र से युक्त हो तो ४०वें वर्ष में पुत्र का लाभ होता है॥९२॥ पुत्रस्थानं गते राहौ तदीशे पापसंयुते। नीचराशिगते जीवे द्वात्रिंशे पुत्रमृत्युदः॥९३॥ पाँचवें भाव में राहु हो, पंचमेश पाप से युत हो और गुरु अपनी नीच राशि में हो तो ३२वें वर्ष में पुत्र की मृत्यु होती है॥९३॥ जीवात्पञ्चमगे पापे लग्नात्पुत्रं गतेऽपि च। षड्विंशे च त्रयस्त्रिंशे चत्वारिंशे सुतक्षयः ॥९४॥ गुरु से पाँचवें भाव में पापग्रह हों और लग्न से पाँचवें भाव में भी गये हों तो २६वें और ४०वें वर्ष में पुत्र का नाश होता है॥९४॥ लग्ने मान्दिसमायुक्ते लग्नेशे नीचराशिगे। षट्पञ्चाशदब्देषु पुत्रशोकाकुलो भवेत् ॥९५॥ लग्न में गुलिक हो और लग्नेश अपनी नीच राशि में हो तो ५६वें वर्ष में पुत्रशोक होता है॥९५॥