भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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द्वादशभावविचाराध्यायः १६३ सन्तानसंख्याज्ञानमाह- चतुर्थे पापसंयुक्ते षष्ठे चैव तथैव हि। सुतेशे परमोच्चस्थे लग्नेशेन समन्विते।।९६।। कारके शुभसंयुक्ते दशसंख्यास्तु सूनवः। यदि ४, ६ भाव में पापग्रह हों, सुतेश लग्नेश से युत होकर परम उच्च में हो, सुतभावकारक शुभग्रह से युत हो तो दश पुत्र होते हैं।।९६।। परमोच्चगते जीवे धनेशे राहुसंयुते ।।९७।। भाग्येशे भाग्यसंयुक्ते संख्यानां नव सूनवः।।९८।। गुरु परमोच्च में हो, धनेश राहु से युत हो और भाग्येश भाग्यस्थान में हो तो ९ पुत्र होते हैं।।९७-९८।। पुत्रभाग्यगते जीवे सुतेशे बलसंयुते । धनेशे कर्मराशिस्थे वसुसंख्यास्तु सूनवः।।९९।। पंचम वा भाग्य स्थान में गुरु हो, पंचमेश बली हो और धनेश १०वें स्थान में हो तो ८ पुत्र होते हैं।।९९।। पञ्चमात्पञ्चमे मन्दे सुतस्थे च तदीश्वरे । सूनवः सप्तसंख्याश्च द्विगर्भे यमलं भवेत् ।।१०० ।। पाँचवें भाव से पंचम में शनि हो, पाँचवें भाव में पंचमेश हो तो ७ पुत्र होते हैं, जिन में २ यमल (जुड़वा) होते हैं।।१००।। वित्तेशे पञ्चमस्थे च सुतस्थे पञ्चमाधिपे । षट्संख्या च सुतप्राप्तिस्तेषां च त्रिप्रजामृतिः ।।१०१ ।। धनेश पाँचवें भाव में, पंचमेश पंचम में हो तो ६ पुत्र होते हैं, जिसमें तीन मर जाते हैं।।१०१।। लग्नात्पञ्चमगे जीवे जीवात्पञ्चमगे शनौ । मन्दात्पञ्चमगे राहौ पुत्रमेकं विनिर्दिशेत् ।।१०२।। लग्न से पाँचवें भाव में गुरु, गुरु से पाँचवें भाव में शनि हों, शनि से पाँचवें राहु हो तो १ पुत्र होता है।।१०२।। पञ्चमे पापसंयुक्ते जीवात्पञ्चमगे शनौ। सुतेशे भौमसंयुक्ते लग्नेशे धनसङ्गते। जातं जातं विनाशं च दीर्घायुश्चैव मानवः।।१०३।।