बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सप्तमेश यदि अपनी राशि से भिन्न राशि में ६।८।१२ भाव में नीचादि राशि में हो तो स्त्री रोगिणी होती है।।१३१।। सप्तमे तु स्थिते शुक्रेऽतीवकामी भवेन्नरः। यत्र कुत्र स्थिते पापयुते स्त्रीमरणं भवेत् ।।१३२।। सातवें स्थान में शुक्र हो तो पुरुष अत्यंत कामी होता है। कहीं किसी भाव में शुक्र पापग्रह से युत हो तो स्त्री की मृत्यु होती है।।१३२।। दाराधिपः पुण्यग्रहेण युक्तो दृष्टोऽपि वा पूर्णबलः प्रसन्नः । सौभाग्ययुक्तो गुणवान्प्रभुश्च दाता विभोग्यं बहुधान्ययुक्तः ।। यदि सप्तमेश शुभग्रह से युत-दृष्ट हो, पूर्ण बलवान् हो, असांगत आदि न हो तो पुरुष भाग्यवान्, गुणी, दाता, धन-धान्य से युक्त होता है।।१३३।। कलत्रेशेऽस्तनीचशत्रुराशिगतेष्वपि । बहुभार्यान्तरं विद्याद्रोगिणीं च विशेषतः ।।१३४।। सप्तमेश अस्तंगत हो, नीचराशि में हो, शत्रुराशि में हो तो अनेक स्त्री रोगिणी होती हैं।।१३४।। परमोच्चगते सप्ताधिनाथे मन्दराशौ शुभखेचरेण दृष्टे । अथवा भृगुसदने तुंगे बहुभार्या प्रवदन्ति बुद्धिमन्तः ।।१३५।। सप्तमेश परमोच्च में होकर शनि की राशि में शुभग्रह से देखा जाता हो अथवा शुक्र की राशि में उच्च का हो तो अनेक स्त्रियाँ होती हैं।।१३५।। वन्ध्यासंगो भवेद्भानौ चन्द्रे राशिसमस्त्रियः । कुजे रजस्वलासंगो वन्ध्यासंगश्च कीर्त्तितः ।।१३६।। सातवें सूर्य हो तो विधवा से संबंध होता है। चंद्रमा हो तो सप्तमस्थ राशि की जाति से, भौम हो तो रजस्वला और वंध्या से।।१३६।। बुधे वेश्या चं हीना च वणिक् स्त्री वा प्रकीर्त्तितः । गुरौर्ब्राह्मणभार्या स्याद्गर्भिणीसङ्ग एव च ।।१३७।। बुध हो तो वेश्या, हीना या बनिया की स्त्री से, गुरु हो तो ब्राह्मणी से वा गर्भिणी से।।१३७।। हीना च पुष्पिणी वाच्या मन्दराहुफणीश्वरैः । कुजेऽथ सुस्तनी मन्दे व्याधिदौर्बल्यसंयुता ।।१३८।। कटिनोर्ध्वकुचार्ये च शुक्रे स्थूलोत्तमस्तनी ।