बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंद्वादशभावविचाराध्यायः १७१ कुटुम्बस्थानगे शुक्रे दारेशे लाभराशिगे । दशमे षोडशाब्दे च विवाहः प्रायशो भवेत् ॥१५२॥ दूसरे भाव में शुक्र हो और सप्तमेश ११वें भाव में हो तो १०वें या १६वें वर्ष में विवाह होता है॥१५२॥ लग्नकेन्द्रगते शुक्रे लग्नेशे मन्दराशिगे। वत्सरेकादशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः॥१५३॥ लग्न वा केन्द्र में शुक्र हो और लग्नेश शनि की राशि में हो तो ११वें वर्ष में विवाह होता है॥१५३॥ लग्नात्केन्द्रगते शुक्रे तस्मात्कामगते शनौ । द्वादशैकोनविंशे च विवाहः प्रायशो भवेत् ॥१५४॥ लग्न से केन्द्र में शुक्र हो, उससे सातवें भाव में शनि हो तो १२वें वा १९वें वर्ष में विवाह होता है॥१५४॥ चन्द्राज्जामित्रगे शुक्रे शुक्राज्जामित्रगे शनौ । वत्सरेऽष्टादशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः॥१५५॥ चन्द्रमा से ७वें भाव में शुक्र हो और शुक्र से ७वें भाव में शनि हो तो १८वें वर्ष में प्रायः विवाह होता है॥१५५॥ धनेशे लाभराशिस्थे लग्नेशे कर्मराशिभे । अब्दे पञ्चदशे जाते विवाहं लभते नरः॥१५६॥ द्वितीयेश लाभभाव में हो और लग्नेश १०वें भाव में हो तो १५वें वर्ष में विवाह होता है॥१५६॥ धनेशे लाभराशिस्थे लाभेशे धनराशिगे। अब्दत्रयोदशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः॥१५७॥ धनेश (द्वितीयेश) लाभभाव में और लाभेश (११ भाव का स्वामी) धन भाव में हो तो १३वें वर्ष में विवाह होता है॥१५७॥ रन्ध्राज्जामित्रगे शुक्रे तदीशे भौमसंयुते । द्वाविंशे सप्तविंशाब्दे विवाहो लभते नरः॥१५८॥ अष्टमभाव से सातवें भाव में शुक्र हो और सप्तमेश भौम से युत हो तो २२वें या २७वें वर्ष में विवाह होता है॥१५८॥ दारांशकगते लग्ननाथे दारेश्वरे व्यये। त्रयोविंशे च षड्विंशे विवाहं लभते नरः॥१५९॥