बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७२ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सप्तम भाव के नवांश में लग्नेश हो और सप्तमेश बारहवें भाव में हो तो २३वें या २६वें वर्ष में विवाह होता है॥१५९॥ रन्ध्रांशे दारराशिस्थे लग्नांशे भृगुसंयुते। पञ्चविंशे त्रयस्त्रिंशे विवाहं लभते नरः॥१६०॥ अष्टम भाव की नवांश राशि सातवें भाव में हो और लग्न के नवांश में शुक्र युत हो तो २५वें या ३३वें वर्ष में विवाह होता है॥१६०॥ भाग्याद्भाग्यगते शुक्रे तद्व्यये राहुसंयुते। एकत्रिशात्त्रयस्त्रिंशे दारलाभं विनिर्दिशेत् ॥१६१॥ भाग्यस्थान से भाग्यभाव में शुक्र हो, उससे बारहवें भाव में राहु हो तो ३१वें वा ३३वें वर्ष में विवाह होता है॥१६१॥ भाग्याज्जामित्रगे शुक्रे तद्द्यूने दारनायके। त्रिंशे वा सप्तत्रिंशाब्दे विवाहं लभते नरः॥१६२॥ भाग्यभाव से ७वें भाव में शुक्र हो, उससे बारहवें भाव में राहु हो तो ३०वें वा ३७वें वर्ष में विवाह होता है॥१६२॥ स्त्रीमृत्युसमयमाह— दारेशे नीचराशिस्थे शुक्रे रन्ध्रारिसंयुते। अष्टादशे त्रयस्त्रिंशे वत्सरे दारनाशनम्॥१६३॥ सप्तमेश अपनी नीच राशि में हो और शुक्र ८, ६ भाव में हो तो १८वें या ३३वें वर्ष में स्त्री का नाश होता है॥१६३॥ मदेशे नाशराशिस्थे व्ययेशे मदराशिगे। तस्य चैकोनत्रिंशाब्दे दारनाशं विनिर्दिशेत् ॥१६४॥ सप्तमेश ८वें भाव में हो और व्ययेश सातवें भाव में हो तो २९वें वर्ष में स्त्री का नाश होता है॥१६४॥ कुटुम्बस्थानगे राहुः कलत्रे भौमसंयुते। पाणिग्रहे विवाहे च सर्पदंष्ट्रे वधूमृतिः॥१६५॥ दूसरे भाव में राहु हो और सातवें भाव में भौम हो तो विवाह के बाद ही साँप के काटने से स्त्री की मृत्यु होती है॥१६५॥ रन्ध्रस्थानगते शुक्रे तदीशे सौरिराशिगे। द्वादशैकोनविंशाब्दे दारनाशं विनिर्दिशेत् ॥१६६॥