भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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द्वादशभावविचाराध्यायः १७५ लग्नेश अपनी उच्चराशि में हो और चन्द्रमा लाभभाव में हो तथा आठवें भाव में गुरु हो तो दीर्घायु होती है, इसमें संशय नहीं है ।।१८१।। अथ नवमभावफलमाह- गुरुस्थानगते जीवे तदीशे केन्द्रसंस्थिते। लग्नेशे बलसंयुक्ते बहुभाग्याधिपो भवेत् ।।१८२।। नवम स्थान में गुरु हो, नवमेश केन्द्र में हो और लग्नेश बलवान् हो तो बड़ा ही भाग्यवान् होता है।।१८२।। भाग्येशे बलसंयुक्ते भाग्ये भृगुसमन्विते। लग्नात्केन्द्रगते जीवे पितृभाग्यसमन्वितः।।१८३।। भाग्येश बलवान् हो, भाग्यस्थान में शुक्र हो, लग्न से केन्द्र में गुरु हो तो पिता भाग्यवान् होता है।।१८३।। भाग्यस्थानाद्द्वितीये वा सुखे भौमसमन्विते। भाग्येशे नीचराशिस्थे पिता निर्धन एव च ।।१८४।। भाग्यस्थान से दूसरे वा चौथे स्थान में भौम हो और भाग्येश नीच राशि में हो तो पिता निर्धन होता है।।१८४।। भाग्येशे परमोच्चस्थे भाग्यांशे जीवसंयुते। लग्नाच्चतुष्टये शुक्रे पिता दीर्घायुरादिशेत् ।।१८५।। भाग्येश परम-उच्चांश में हो, गुरु भाग्यांश में हो, लग्न से केन्द्र में शुक्र हो तो पिता दीर्घायु होता है।।१८५।। भाग्येशे केन्द्रभावस्थे गुरुणा च निरीक्षिते। तत्पिता वाहनैर्युक्तो राजा वा तत्समो भवेत् ।।१८६।। भाग्येश केन्द्र में गुरु से देखा जाता हो तो उसका पिता वाहन से युक्त राजा वा उसके समान होता है।।१८६।। भाग्येशे कर्मभावस्थे कर्मेशे भाग्यराशिगे। शुभयोगे धनाढ्यश्च कीर्त्तिमांस्तत्पिता भवेत् ।।१८७।। भाग्येश कर्मभाव में हो, कर्मेश भाग्यभाव में हो और शुभग्रह से किसी प्रकार का संपर्क हो तो उसका पिता धनी और कीर्त्तिमान् होता है।।१८७।।