भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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द्वादशभावविचाराध्यायः १७७ आठवें स्थान में सूर्य हो और अष्टमेश भाग्यभाव में हो तो बालक के पहले वर्ष में ही पिता की मृत्यु होती है।।१९४।। व्ययेशे भाग्यराशिस्थे नीचांशे भाग्यनायके। तृतीये षोडशे वर्षे जनकस्य मृतिर्भवेत् ।।१९५।। व्ययेश भाग्यभाव में, भाग्येश नीचांश में हो तो तीसरे वा सोलहवें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है।।१९५।। लग्नेशे नाशराशिस्थे रन्ध्रेशे भानुसंयुते। द्वितीये द्वादशे वर्षे पितुर्मरणमादिशेत् ।।१९६।। लग्नेश आठवें भाव में और अष्टमेश सूर्य से युत हो तो दूसरे वा १२वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है।।१९६।। भाग्याद्रन्ध्रगते राहौ भाग्याद्भाग्यगते रवौ। राहुणा सहिते सूर्ये चन्द्राद्भाग्यगते शनौ ।।१९७।। सप्तमैकोनविंशाब्दे तातस्य मरणं भवेत्। भाग्यभाव से आठवें भाव में राहु हो, भाग्य से भाग्यभाव में रवि राहु से युक्त हो और चन्द्रमा से भाग्यभाव में शनि हो तो ७वें या १९वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है।।१९७।। भाग्येशे व्ययराशिस्थे व्ययेशे भाग्यराशिगे ।।१९८।। चतुश्चत्वारिवर्षाच्च पितुर्मरणमादिशेत्। भाग्येश १२वें भाव में और व्ययेश भाग्यभाव में हो तो ४४वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है।।१९८।। रव्यंशे च स्थिते चन्द्रे लग्नेशे रन्ध्रसंयुते ।।१९९।। पञ्चत्रिंशैकचत्वारिंशद्वर्षे पितृनाशनम्। सूर्य के नवांश में चन्द्रमा हो और लग्नेश आठवें भाव में हो तो ३५वें वा ४१वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है।।१९९।। पितृस्थानाधिपे सूर्ये मन्दभौमसमन्विते ।।२००।। पञ्चाशद्वत्सरे प्राप्ते जनकस्य मृतिर्भवेत्। पितृस्थान (१०) का स्वामी सूर्य हो और शनि-भौम से युत हो तो ५०वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है।।२००।। भाग्यात्सप्तमगे सूर्ये भ्रातृसप्तमगस्तमः ।।२०१।। षष्ठे वा पञ्चविंशाब्दे पितुर्मरणमादिशेत्।