बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् भाग्यभाव से ७वें सूर्य हो और भ्रातृभाव से ७वें राहु हो तो छठे वा २५वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है॥२०१॥ रन्ध्रजामित्रगे मन्दे मन्दाज्जामित्रगे रवौ॥२०२॥ त्रिंशैकविंशे षड्विंशे जनकस्य मृतिर्भवेत्। आठवें से सातवें भाव में शनि हो और शनि से ७वें भाव में राहु हो तो ३०वें, २१वें वा २६वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है॥२०२॥ भाग्येशे नीचराशिस्थे तदीशे भाग्यराशिगे॥२०३॥ षड्विंशे च त्रयस्त्रिंशे पितुर्मरणमादिशेत्। एवं तातस्य भो विद्वन् फलं ज्ञात्वा समादिशेत्॥२९४॥ भाग्येश नीच राशि में और नीच राशि का स्वामी भाग्यभाव में हो तो २६वें वा ३३वें वर्ष में पिता की मृत्यु होती है। इस प्रकार से पिता की मृत्यु का विचार कर आदेश देना चाहिए॥२०३-२०४॥ परमोच्चांशगे शुक्रे भाग्येशेन समन्विते। भ्रातृस्थाने शनियुते बहुभाग्याधिपो भवेत्॥२०५॥ भाग्येश से युत शुक्र परम-उच्चांश में हो और मातृस्थान में शनि हो तो बड़ा भाग्यवान् होता है॥२०५॥ गुरुणा संयुते भाग्ये तदीशे केन्द्रराशिगे। विंशद्वर्षात्परं चैव बहुभाग्यं विनिर्दिशेत्॥२०६॥ भाग्यस्थान में गुरु हो और भाग्येश केंद्र में हो तो २२ वर्ष के बाद भाग्योदय होता है॥२०६॥ परमोच्चांशगे सौम्ये भाग्येशे भाग्यराशिगे। षट्त्रिंशाच्च परं चैव बहुभाग्यं विनिर्दिशेत्॥२०७॥ बुध परम उच्चांश में हो और भाग्येश भाग्यभाव में हो तो ३६वें वर्ष के बाद भाग्योदय होता है॥२०७॥ लग्नेशे भाग्यराशिस्थे भाग्येशे लग्नसंयुते। गुरुणा संयुते द्यूने धनवाहनलाभकृत्॥२०८॥ लग्नेश भाग्यभाव में और भाग्येश लग्न में हो तथा गुरु सप्तम भाव में हो तो धन-वाहन से युक्त होता है॥२०८॥