बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभावेशफलाध्यायः १८७ धनेश नवम भाव वा लाभभाव में हो तो जातक धनी, उद्यमी, विद्वान् होता है। बाल्य अवस्था में रोगी और पीछे आयु पर्यन्त सुखी होता है॥१९६।। धनेशो दशमे यस्य कामी मानी च पण्डितः। बहुदारधनैर्युक्तः सुतहीनो प्रजायते ॥१९७।। धनेश दशम भाव में हो तो जातक कामी, मानी, पंडित, अनेक स्त्री तथा धन से युक्त और पुत्रहीन होता है॥१९७।। धनेशे व्ययगे ज्ञानी साहसी धनवर्जितः। जीविका नृपगेहाच्च ज्येष्ठपुत्रसुखं न हि।।१९८।। धनेश बारहवें भाव में हो तो जातक ज्ञानी, साहसी, धनहीन, राजगृह से जीविकावाला और ज्येष्ठ पुत्र के सुख से हीन होता है।।१९८।। अथ सहजेशभावफलम्— तृतीयेशे तनौ लाभे स्वभुजार्जितवित्तवान्। मूर्खः कृशो महारोगी साहसी परसेवकः।।१९९।। तृतीयेश लग्न या लाभ भाव में हो तो जातक अपनी कमाई से धनी, मूर्ख, कृश, महारोगी अपितु साहसी, दूसरे का सेवक होता है।।१९९।। गुदाभञ्जनिकः स्थूलः परभार्याधने रुचिः। स्वल्पारम्भी सुखी न स्यात्तृतीयेशे धनं गते ।।२००।। तृतीयेश दूसरे भाव में हो तो जातक स्त्री के स्वभाव का, स्थूल, परस्त्री के धन से कार्य आरम्भ करने वाला और सुखी नहीं होता है।।२००।। तृतीयेशे तृतीयस्थे विक्रमी सुतसंयुतः। धनयुक्तो महाहृष्टो भुनक्ति सुखमद्भुतम्।।१२१.।। तृतीयेश तीसरे भाव में हो तो जातक पराक्रमी, पुत्रवान्, धनी; प्रसन्न और अद्भुत सुख को भोगने वाला होता है।।१२१।। तृतीयेशे सुखे कर्मे पञ्चमे वा सुखी सदा। अतिक्रूरा भवेद्भार्या धनाढ्यो मतिमान् भवेत्।।१२२।। तृतीयेश चौथे, दसवें और पाँचवें भाव में हो तो जातक सदा सुखी, अतिक्रूर स्त्री से युक्त, धनी और बुद्धिमान् होता है।।१२२।।