बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् तृतीये शो रिपौ यस्य भ्राता शत्रुर्महाधनी। मातुलानां सुखं न स्यान्मातुल्या भोगमिच्छति॥२३॥ तृतीयेश छठे भाव में हो तो जातक का भाई शत्रु होता है। जातक स्वयं महाधनी, मामा के सुख से हीन और मामी से संभोग की इच्छावाला होता है॥२३॥ तृतीयेऽष्टमे द्यूने राजद्वारे मृतिर्भवेत्। चोरो वा परगामी वा बाल्ये कष्टं दिने दिने॥२४॥ तृतीयेश आठवें या सातवें भाव में हो तो जातक की मृत्यु राजद्वार में होती है, चोर, परस्त्रीगामी और बाल्य समय में कष्ट भोगने वाला होता है॥२४॥ तृतीये शे व्यये भाग्ये स्त्रीभिर्भाग्योदयो भवेत्। पिता तस्य महाचोरः सुखेऽपि दुःखदर्शकः॥२५॥ तृतीयेश बारहवें या भाग्यभाव में हो तो जातक का भाग्योदय स्त्री के द्वारा होता है और उसका पिता बड़ा चोर होता है॥२५॥ अथ सुख