भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 800 में से

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पृष्ठ 188

१९० बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सुतेशे चायुधि धने बहुपुत्री न संशयः। कासश्वाससुखी न स्यात्क्रोधयुक्तो धनान्वितः।।३६।। पंचमेश ८वें वा रसरे भाव में हो तो जातक अनेक पुत्रों से युक्त, कांस-श्वास रोगी, क्रोधी और धनी होता है।।३६।। सुतेशे मातृभवने चिरं मातृसुखं भवेत्। लक्ष्मीयुक्तः सुबुद्धिश्च सचिवोऽप्यथवा गुरुः ।।३७।। सुतेश ४ भाव में हो तो जातक को माता का सुख अधिक, लक्ष्मीयुक्त, बुद्धिमान्, मंत्री वा गुरु होता है। मुंहूर्त्त को जानने वाला, टेढ़ा बोलने वाला, धनी और बुद्धिमान् होता है।।३७।। सुतेशे पञ्चमे यस्य तस्य पुत्रो न जीवति। क्षणिकः क्रूरभाषी च धनिको मतिमान्भवेत् ।।३८।। सुतेश ५वें भाव में हो तो जातक का पुत्र नहीं जीता है।।३८।। सुतेशे षष्ठरिःफस्थे पुत्रः शत्रुत्वमाप्नुयात्। मृतापत्यो दत्तपुत्रो धनपुत्रोऽथवा भवेत् ।।३९।। सुतेश छठे, बारहवें भाव में हो तो जातक को पुत्र से शत्रुता होती है और उसके पुत्र मर जाते हैं। उसे दत्तक पुत्र या क्रीत पुत्र होता है।।३९।। सुतेशे कामगे मानी सर्वधर्मसमन्वितः। तुंगबष्टिस्तनुस्वामी भंक्तियुक्तैकचेतसा ।।४०।। सुतेश ७वें भाव में हों तो जातक मानी, सभी धर्मों से युक्त, ऊँचे नाक वाला और भक्ति युक्त होता है।।४०।। सुतेशे नवमे कर्मे पुत्रो भूपसमो भवेत्। अथवा ग्रन्थकर्ता च विख्यातः कुलदीपकः।।४१।। सुतेश ९वें या १०वें भाव में हो तो जातक का पुत्र राजा के समान होता है अथवा प्रसिद्ध ग्रंथकर्त्ता होता है।।४१।। सुतेशे लाभभवने पण्डिंतो जनवल्लभः। ग्रन्थकर्त्ता महादक्षो बहुपुत्रधनान्वितः।।४२।। सुतेश लाभभाव में हो तो जातक पंडित, लोकप्रिय, ग्रंथकर्त्ता, दक्ष, अनेक पुत्र और धन से युक्त होता है।।४२।।

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