भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 207

अथानेकयोगाध्यायः २०९ लग्नेश अपनी उच्चराशि का होकर केन्द्र में हो और गुरु से देखा जाता हो तो (चामर) योग होता है। यदि लग्न सप्तम वा नवम वा दशम में दो शुभग्रह हों तो (चामर) योग होता है। चामरयोग में उत्पन्न पुरुष राजा से पूज्य, विद्वान्, वक्ता, पंडित वा राजा, सर्वज्ञ, वेद शास्त्र का अधिकारी, ७० वर्ष तक जीने वाला होता है॥११-१२॥ अथ शङ्खयोगः- अन्योन्यकेन्द्रगृहगौ सुतशत्रुनाथौ लग्नाधिपे बलयुतेयदुशंखयोगः। लग्नाधिपेच गगनाधिपतौ चरस्थे भाग्याधिपेबलयुते तु तथावदन्ति।। शंखे जांतो भोगशीलो दयालुः स्त्रौपुत्रार्थक्षेत्रवान् पुण्यकर्मा। शास्त्रज्ञानाचारसाधुक्रियावान् जीवेल्लोके वत्सराणामशीतिः ।।१४।। पंचमेश, षष्ठेश परस्पर केन्द्र में हों, लग्नेश बलवान् हो तो शंख योग होता है। लग्नेश, कर्मेश दोनों चर राशि में हों, भाग्येश बली हो तो (शंख) योग होता है। शंख योग में उत्पन्न पुरुष भोगी, दयालु, स्त्री, पुत्र, धन और क्षेत्र से युक्त पुण्य कार्य करने वाला, पंडित, सज्जन और ८० वर्ष तक जीने वाला होता है।।१३-१४।। अथ भेरीयोगमाह- स्वान्त्योदयास्तभवनेषु वियच्चरेषु कर्माधिपेबलयुते यदि भेरियोगः। केन्द्रे गते सुरगुरौ सितलग्ननाथौभाग्येश्वरे बलयुतेतु तथैववाच्यम् ।। दीर्घायुषो विगतरोगभया नरेन्द्रा बह्वर्थभूमिसुतदारयुताः प्रसिद्धाः। आचारभूरिसुखशौर्यर्महानुभावा भेरीप्रजागमनुजा निपुणाः कुलीनाः।।१६।। यदि २।१२।७ भाव में ग्रह हों और कर्मेश बली हो तो भेरी योग होता है। भाग्येश बली हो, गुरु, शुक्र, लग्नेश केन्द्र में हों तो भेरी योग होता है। भेरी योग में उत्पन्न पुरुष दीर्घायु, नीरोगी, निर्भय, राजा, भूमि, धन, पुत्र, स्त्री से युक्त, प्रसिद्ध, आचारवान्, सुख-पराक्रम से युक्त, निपुण और कुलीन होते हैं।।१५-१६।। अथ मृदङ्गयोगमाह- उच्चग्रहांशकपती यदि कोणकेन्द्रे तुङ्गस्वकीयभवनोपगते बलाढ्ये।