भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

पृष्ठ 216, कुल 800 में से

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२१८ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् इनमें मुख्य दो ग्रह होते हैं- १. भाग्येश राजा होता है और २. पंचमेश मंत्री होता है। दोनों का परस्पर दृष्टिसंबंध हो तों जातक राजा होता है॥२॥ यत्र कुत्रापि संयुक्तौ तौ वापि समसप्तमौ। राजवंशोद्भवो बालो राजा भवति निश्चितम् ।।३।। उक्त दोनों ग्रह कहीं पर एक साथ हों अथवा एक दूसरे के सातवें भाव में हों तो इस योग में राजा का लड़का राजा होता है।।३।। वाहनेशस्तथा माने मानेशो वाहने स्थितः। बुद्धिधर्माधिपाभ्यां तु दृष्टश्चेदिह राज्यभाक् ।।४।। सुखेश दशम स्थान में और कर्मेश सुख स्थान में और पंचमेश नवमेश से देखा जाता हो तो राजयोग होता है।।४।। सुतेशकर्मेशसुखेशलग्ननाथा यदा धर्मपसंयुताश्चेत्। नृपोत्तमश्चेदिह वारणाढ्यः स्वतेजसा व्याप्तदिगन्तरालः ।।५।। पंचमेश, कर्मेश, सुखेश, लग्नेश यदि धर्मेश से युत हों तो हाथी, घोड़े आदि से युक्त अपने तेज से दिशाओं में प्रसिद्ध उत्तम राजा होता है।।५।। सुखकर्माधिपौ चैव मन्त्रिनाथेन संयुतौ। धर्मेशेनाऽथ वा युक्तौ जातश्चेदिह राज्यभाक् ।।६।। सुखेश, कर्मेश यदि पंचमेश धर्मेश से युत हों तो जातक राज्य का अधिकारी होता है।।६।। सुतेश्वरो धर्मपसंयुतश्चे- ल्लग्नेश्वरेणापि युतो विलग्ने। सुखेऽथवा मानगृहेऽथ वा स्याद् राज्याभिषिक्तो यदि राजवंश्यः ।।७।। पंचमेश, धर्मेश लग्नेश से युत होकर लग्न में हों वा चतुर्थ वा दशम स्थान में हों तो यदि राजा का लड़का हो तो वह राजा होता है।।७।। धर्मस्थाने गुरुक्षेत्रे स्वगृहे भृगुसंयुते। पञ्चमाधिपसंयुक्ते जातश्चेदिह राज्यभाक् ।।८।। नवम स्थान में गुरु की राशि हो और अपने स्थान में शुक्र हो तथा पंचमेश से युत हो तो राजा होता है।।८।।