बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)
Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary
महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रहाणामवस्थाध्यायः २३५ दुःखार्दितस्यापि दशाविपाके नानाविधं दुःखमुपैति नित्यम्। विदेशगो बन्धुजनैर्विहीनश्चौराग्निभूपैर्भयमातनोति।।१४।। अतिदुःखी ग्रह की दशा में अनेक प्रकार के दुःखों से युक्त, विदेश यात्रा, बंधुओं से त्याज्य, चोर, अग्नि और राजा से भय होता है।।१४।। वैकल्यखेटस्य दशाविपाके वैकल्यमायाति मनोविकारम्। मित्रादिकानां मरणं विशेषात्स्त्रीपुत्रयानाम्बरचोरपीडाम्।।१५।। विकल ग्रह की दशा में शरीर में विकलता, मन में विकार, मित्रादिकों का मरण, स्त्री, पुत्र, सवारी आदि की पीडा होती है।।१५।। दशाविपाके कलहं वियोगं खलस्य खेटस्य पितुर्वियोगम्। शत्रोर्जनानां धनभूमिनाशमुपैति नित्यं स्वजनैश्च निन्दाम्।।१६।। खल ग्रह की दशा में कलह, वियोग, पिता का वियोग, शत्रु द्वारा जन, धन, भूमि का नाश और अपने ही लोगों से नित्य निंदा होती है।।१६।। कोपान्वितस्यापि दशाविपाके पापाः समायान्ति बहुप्रकारैः। विद्याधनस्त्रीसुतबन्धुनाशं पुत्रादिकृच्छ्रं खलु नेत्ररोगम्।।१७।। कोपी ग्रह की दशा में अनेक प्रकार के पापकर्म, विद्या, धन, स्त्री, पुत्र और बंधुओं का नाश, पुत्रादि को कष्ट और नेत्ररोग होता है।।१७।। अथ बालाद्यवस्थाफलम्- बालो रसांशैरसमे प्रदिष्टस्ततः कुमारो हि युवाथ वृद्धः। मृतः क्रमादुत्क्रमतः समर्क्षे बालाद्यवस्था कथिता ग्रहाणाम्।। फलं तु किञ्चिद्वितनोति बालश्चार्द्धं कुमारो यतते न पुंसाम्। युवा समग्रं खचरोऽथ वृद्धः फलं च दुष्टं मरणं मृताख्यम्।।१९।। एक राशि में षष्ठांश के तुल्यं बाल, कुमार, युवा, वृद्ध और मृत ये पाँच अवस्थाएँ होती हैं। बाल साधारण, कुमार में आधा, युवा में कुछ, वृद्ध में संपूर्ण और मृत में मृत्यु होती है।।१८।१९।। अथ प्रवासाद्यवस्थाफलम्- प्रवासनष्टा च मृता जया हास्या रतिर्मुदा। शुचा ज्वरा च कम्प्रा च सुस्थिता चाथ सन्निभा।।२०।।