भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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पृष्ठ 232

·२३४· बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् जो ग्रह अपनी उच्चराशि में होता है वह दीप्त होता है। अपने अधिमित्र के गृह में हो तो स्वस्थ, मित्र के गृह में हो तो मुदित, सम के गृह में हो तो दीन।।७।। शत्रुभे दुःखितोऽतीवविकलः पापसंयुतः। खलः खलग्रहे ज्ञेयः कोपी स्यादर्कसंयुतः॥८॥ शत्रु की राशि में हो तो अतिदुःखी, पापग्रह के साथ हो तो विकल, पापग्रह की राशि में हो तो खल और सूर्य के साथ हो तो कोपी होता है॥८।। पाके प्रदीप्तस्य धराधिपत्यमुत्साहशौर्यं धनवाहने च। स्त्रीपुत्रलाभं शुभबन्धुपूजां क्षितीश्वरान्मानमुपैति विद्याम्।।९।। दीप्त ग्रह की राशि में पृथ्वी का लाभ, उत्साह, पराक्रम, धन, वाहन, स्त्री-पुत्र का लाभ, शुभकार्य, बंधुओं से प्रतिष्ठा और राजा से प्रतिष्ठा का लाभ होता है।।८।। स्वस्थस्य खेटस्य दशाविपाके स्वस्थो नृपाल्लब्धधनादिसौख्यम्। विद्यां यशः प्रीतिमहत्त्वमाराद्वारार्थभूम्यात्मजधर्ममेति।।१०।। स्वस्थ ग्रह की दशा में स्वस्थता, राजा से प्राप्त धन आदि का सुख, विद्या, यश, धन-धर्म आदि का लाभ होता है।।१०।। मुदान्वितस्यापि दशाविपाके वस्त्रादिकं गन्धसुतीर्थधैर्यम्। पुराणधर्मश्रवणादिलाभं हयादियानाम्बरभूषणाप्तिम्।।११।। मुदित ग्रह की दशा में वस्त्र, गंध, तीर्थयात्रा, धैर्य, पुराण आदि का श्रवण, घोड़ा आदि सवारियों का लाभ, आभूषण का लाभ होता है।।११।। दशाविपाके सुखधर्ममेति शान्तस्य भूपुत्रकलत्रयानम्। विद्याविनोदान्वितधर्मशास्त्रं बह्वर्थदेशाधिपपूज्यतां च।।१२।। शांत की दशा में सुख, धर्म का लाभ, भूमि, स्त्री, सवारी, विद्या- का विनोद, धर्मशास्त्र, बहुत धन तथा राजाओं से पूज्य होता है।।१२।। स्थानच्युतिबन्धुविरोधता च दीनस्य खेटस्य दशाविपाके। जीवत्यसौ कुत्सितहीनवृत्त्या त्यक्तो जनै रोगनिपीडितः स्यात्।१३। दीन ग्रह की दशा में स्थानच्युति, बंधुओं से विरोध, कुत्सित वृत्ति से जीविका, लोगों से त्यागा हुआ और रोग से पीडित होता है।।१३।।