भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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२४४ बृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् सितेतरे पापरतो निशाकरे विशेषतः क्रूरतरो नरो भवेत्। सदाक्षिरोगैः परिपीड्यमानो बलक्षपक्षे गमने भयातुरः॥६९॥ यदि चंद्रमा कृष्णपक्ष में गमन अवस्था में हो तो पापी और क्रूर स्वभाव का, नेत्ररोगी और शुक्लपक्ष में भयभीत होता है॥६९॥ विधावागमने मानी पादरोगी नरो भवेत्। गुप्तपापरतो दीनो मतितोषविवर्जितः॥७०॥ आगमन अवस्था में हो तो मानी, चरण में रोग युक्त, गुप्त पाप करने वाला दीन, मलिन और असंतोषी होता है॥७०॥ सकलजनवदान्यो राजराजेन्द्रमान्यो रतिपतिसमकान्तिः शान्तिकृत्कामिनीनाम्। सपदि सदसि याते चारुबिम्बे शशाङ्के भवति परमरीतिप्रीतिविज्ञो गुणज्ञः॥७१॥ सभावस्था में हो तो सभी मनुष्यों में श्रेष्ठ, राजाओं का मान्य, कामदेव के समान सुंदर, स्त्रियों को सुखदाता, प्रीति के रीति को जाननेवाला होता है॥७१॥ विधावागमने मर्त्यो वाचालो धर्मपूरितः। कृष्णपक्षे द्विभार्यः स्याद्रोगी दुष्टनरो हठी॥७२॥ आगमन अवस्था मे हो तो वक्ता, धर्मात्मा, कृष्णपक्ष हो तो दो स्त्री वाला, रोगी, दुष्ट और हठी होता है॥७२॥ भोजने जनुषि पूर्णचन्द्रमा मानयानजनतासुखं नृणाम्। आतनोति वनितासुतासुखं सर्वमेव न सितेतरे शुभम्॥७३॥ भोजन अवस्था में हो तो मान-प्रतिष्ठा, सवारी और सुख से संपन्न, स्त्री-पुत्र से सुखी होता है। कृष्णपक्ष का चन्द्रमा हो तो उक्त फल नहीं होता है॥७३॥ नृत्यलिप्सागते चन्द्रे सबले बलवान्नरः। गीतज्ञो हि रसज्ञश्च कृष्णो पापकरो भवेत्॥७४॥ नृत्यलिप्सा अवस्था में हो और चन्द्रमा शुक्लपक्ष का हो तो बलवान्, गीतज्ञ, रसज्ञ होता है और कृष्णपक्ष का हो तो पापी होता है॥७४॥ कौतुकभवनं गतवति चन्द्रे भवति नृपत्वं वा धनपत्वम्। कामकलासु सदा कुशलत्वं वारवधूरतिरमणपटुत्वम्॥७५॥