भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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ग्रहाणामवस्थाध्यायः २४३ सर्वदानन्दधर्ता जनो ज्ञानवान्यज्ञकर्ता धराधीशसद्मस्थितः। पद्मबन्धावरातेर्भयं स्वाननः काव्यविद्याप्रलापी मुदा कौतुके ।।६३।। कौतुक अवस्था में हो तो सदा आनंद करने वाला, ज्ञानी, यज्ञ करने वाला, राजगृह में रहने वाला, शत्रु से भयभीत, सुंदर मुख और काव्य करने वाला होता है।।६३।। निद्राभरारक्तनिभे भवेतां निद्रागते लोचनपद्मयुग्मे। रवौ विदेशे वसतिर्जनस्य कलत्रहानिः कतिथार्थनाशः।।६४।। निद्रा अवस्था में हो तो निद्रा से भरे नेत्रों वाला, विदेशी, स्त्री की हानि और अनेक प्रकार से धन का नाशक होता है।।६४।। अथ चन्द्रावस्थाफलम्- जनुःकाले क्षपानाथे शयनं चेदुपागते। मानी शीतप्रधानश्च कामी वित्तविनाशकः।।६५।। यदि चंद्रमा शयन अवस्था में हो तो उसकी दशा में जातक मानी, शीतल स्वभाव, कामी और धन का नाश करने वाला होता है।।६५।। रोगार्दितो मन्दमतिर्विशेषाद्वित्तेन हीनो मनुजः कठोरः। अकार्यकारी परवित्तहारी क्षपाकरे चेदुपवेशनस्थे।।६६।। उपवेशन अवस्था में हो तो रोगी, मंदबुद्धि, धनहीन, कठोर, कुकर्म में रत, दूसरे के धन को हरण करने वाला होता है।।६६।। नेत्रपाणौ क्षपानाथे महारोगी नरो भवेत्। अनल्पजल्पको धूर्त्तः कुकर्मनिरतः सदा।।६७।। नेत्रपाणि अवस्था में हो तो महारोगी, व्यर्थ बोलने वाला, धूर्त्त और कुकर्म करने वाला होता है।।६७।। यदा राकानाथे गतवति विकाशं च जनने विकाराः संसारे विमलगुणराशेरवनिपात्। नवाशामाला स्यात्करितुरगलक्ष्म्या परिवृता विभूषा योषाभिः सुखमनुदिनं तीर्थगमनम्।।६८।। यदि प्रकाश अवस्था में हो तो संसार में प्रसिद्ध, अपने गुणों से राजा से द्रव्य प्राप्त करने वाला, हाथी, घोड़ा, लक्ष्मी से युक्त, स्त्री से सुखी और तीर्थयात्री होता है।।६८।।