भारतकोश
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

बृहत्पाराशर होरा शास्त्र (महर्षि पराशर - सम्पूर्ण फलित ज्योतिष महाकोश सान्वय सटीक)

Brihat Parashara Hora Shastra of Maharshi Parasara with Commentary

महर्षि पराशर (टीकाकार: पं. गणेशदत्त पाठक / सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished800 पृष्ठ

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ग्रहाणामवस्थाध्यायः २४७ कौतुकी भवति कौतुके कुजे मित्रपुत्रपरिपूरितो जनः। उच्चगे नृपतिगेहमण्डितः पूजितो गुणवरैर्गुणाकरैः ।।८७।। कौतुक अवस्था में हो तो कौतुक करने वाला, मित्र, पुत्र से परिपूर्ण, यदि उच्च में भौम हो तो राजगृह और गुणियों से पूजित होता है।।८७।। निद्रावस्थां गते भौमे क्रोधी धीधनवर्जितः। धूर्तो धर्मपरिभ्रष्टो मनुष्यो गदपीडितः ।।८८।। निद्रा अवस्था में भौम हो तो क्रोधी, बुद्धि-धन से हीन, धूर्त, धर्म से भ्रष्ट और रोगी होता है।।८८।। अथ बुधावस्थाफलम्— क्षुधातुरो भवेदङ्गे खञ्जो गुञ्जानिभेक्षणः। अन्यभे लम्पटो धूर्तो मनुजः शयने बुधे।।८९।। बुध शयन अवस्था में होकर लग्न में हो तो भूखा, चलने में असमर्थ, गुंजा के समान (लाल) नेत्रवाला होता है। अन्य भावों में हो तो लंपट, धूर्त होता है।।८९।। शशाङ्कपुत्रे जनुरङ्गगेहे यदोपवेशे गुणराशिपूर्णः। पापेक्षिते पापयुते दरिद्रो हिते शुभे वित्तसुखी मनुष्यः।।९०।। उपवेशन अवस्था में बुध लग्न में हो तो गुणी, पापग्रह से युत-दृष्ट हो तो दरिद्र, शुभग्रह वा मित्र से युत-दृष्ट हो तो धनी होता है।।९०।। विद्याविवेकरहितो हिततोषहीनो मानी जनो भवति चन्द्रसुतेऽक्षिपाणौ। प्रजालये सुतकलत्रसुखेन हीनः कन्याप्रजा नृपतिगेहबुधो वरार्थः ।।९१।। नेत्रपाणि अवस्था में हो तो विद्या-विवेक से रहित, मित्रतारहित, अभिमानी, ५वें भाव में बुध हो तो स्त्री-पुत्र के सुख से रहित, कन्या संततिवाला, राजा से धन प्राप्त करने वाला होता है।।९१।। दाता दयालुः खलु पुण्यकर्त्ता विकाशने चन्द्रसुते मनुष्यः। अनेकविद्यार्णवपारगन्ता विवेकपूर्णः खलवर्गहन्ता ।।९२।। प्रकाश अवस्था में हो तो दानी, दयालु, पुण्यात्मा; अनेक विद्याओं को जानने वाला, विवेकी और दुष्टों का दमन करने वाला होता है।।९२।।